हिमाचल से शांति गौतम
नब्बे का दशक और मुंबई रेसकोर्स में भाजपा का महाधिवेशन-इस पूरे महाधिवेशन में इसी नारे की चारों ओर गूंज सुनाई दे रही थी। इसी गूंज के बीच भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी को देश के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किया था और कार्यकर्ताओं को आह्वान किया था कि मुंबई रेसकोर्स से शुरू हुई भाजपा की यह राजनीतिक यात्रा अब दिल्ली के ‘7 रेसकोर्स’ पर समाप्त होगी। स्मरण रहे उस समय 7 रेसकोर्स देश के प्रधानमंत्री का अधिकृत आवास एवं कार्यालय हुआ करता था। खैर, भाजपा ने इस नारे को सार्थक किया और आज परिणाम है कि बिहार से बाहर न पहचान रखने वाले 45 वर्षीय नौजवान को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया है। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का नाम बतौर कार्यकारी अध्यक्ष सामने आया तो सबको यह नाम एकदम नया और आश्चर्यचकित कर देने वाला था। यह बात दर्ज करने काबिल है कि अगर वामपंथी दलों को एक तरफ छोड़ दें, जो अब देश की राजनीति में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं, तो भाजपा ही एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा और सहयोग से कार्यकर्ता और नेता निर्माण का कार्य करती है। भाजपा में हजारों ऐसे कार्यकर्ता सक्रिय हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों ने एक योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण देकर तैयार किया है। आज देश में लगभग सभी पार्टियां परिवारवाद की पोषक हैं और केवल भाजपा ही कुछ हद तक अपवाद है। खैर, अब नबीन पर भाजपा के नवीनीकरण की जिम्मेदारी है। कुछ विश्लेषक उनकी ताजपोशी को ‘पीढ़ी परिवर्तन’ मान रहे हैं। भाजपा की परंपरा के अनुसार नितिन नबीन निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं और अब अपनी नवीन टीम का मनोनयन करेंगे। प्रतिष्ठित अखबार की रिपोर्ट कहती है कि संगठन में 70% पद अब 60 वर्ष से कम उम्र वालों को दिए जाएंगे। मेरी समझ में अगर भाजपा वास्तव में संगठन में नए रक्त संचार के लिए गंभीर है, तो भाजपा के सर्वशक्तिमान फोरम ‘पार्लियामेंट्री बोर्ड’ की औसत उम्र भी कम वर्ष तय होनी चाहिए। यह अच्छी सोच है, लेकिन कभी-कभी उम्र का नियम कुछ लोगों को रेस से बाहर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुनिश्चित करना होगा कि यह नियम संगठन में न्यायोचित तरीके से लागू हो और संगठन में जिम्मेदारी देने के लिए एक अधिकतम उम्र तय हो और वह सब पर एक समान लागू हो। नितिन नबीन को शांत लेकिन स्पष्ट संदेश देने वाला नेता माना जाता है। वह कहते हैं कि “राजनीति सौ मीटर की रेस नहीं बल्कि धैर्य व निरंतरता की परीक्षा है।” वे वैचारिक व्यक्ति हैं और संगठन की बारीकियों को भलीभांति जानते हैं। अभी पांच राज्यों के चुनाव की चुनौती उनके सामने है और वे सभी राज्य ऐसे हैं जहां भाजपा अभी अपने संघर्ष के दौर से गुजर रही है। एक दूसरी चुनौती संगठन की छवि को लेकर है; पुराने कार्यकर्ता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि भाजपा अन्य दलों के भ्रष्ट नेताओं की शरणस्थली बनती जा रही है। मेरे विचार में नए अध्यक्ष जी को वरिष्ठ नेताओं से सलाह कर नीतिगत निर्णय करना होगा और इस चलन को निरुत्साहित करना होगा। यह लेख भाजपा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को शुभकामनाएं प्रेषित करता है।











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