शहर के फुटपाथों पर छोटे-बड़े कारोबारियों का कब्जा, प्रशासन मौन, आखिर कहाँ चले पैदल आदमी

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*फुटपाथ पर अतिक्रमण का मुद्दा डी एम के जनसुनवाई कार्यक्रम में भी उठाया पर नही हुई कार्यवाई*

डॉ. हिमांशु द्विवेदी

रिद्वार। शहर के लिए अतिक्रमण नासूर बनता जा रहा है वहीं जिला प्रशासन मौन है। जिलाधिकारी ने जिस प्रकार सफाई अभियान का बीड़ा उठाया जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए इसी प्रकार अतिक्रमण को हटाने के अभियान का भी बीड़ा उठाने का समय आ गया है। देवपुरा चौक से पोस्ट ऑफिस तक सड़क के दोनों तरफ का एक बड़ा हिस्से पर कारोबारियों का कब्जा है । वहीं सड़क के किनारे फुटपाथ के बाद नाली पर पड़े स्लेब पर खान पान, सब्जी और फलों की ठेलियां खड़ी है। जबकि नगर निगम द्वारा इन ठेलियों को लाइसेंस चलते-फिरते बेचने का दिया गया है ना कि एक स्थान पर खड़े हो कर बेचने का । हर की पैड़ी से लेकर पोस्ट ऑफिस तक दुकानों के सामने के स्थान बिकते हैं जिसकी कीमत ₹500 से लेकर ₹1500 तक है चंद्राचार्य चौक से लेकर ज्वालापुर रेलवे फाटक और ऊंची सड़क तक बड़े व्यापारियों और बैंकट हॉल ने पूरे फुटपाथ पर कब्जा जमाया हुआ है। जिस शिकायत को जिलाधिकारी के जनसुनवाई कार्यक्रम और तहसील दिवस पर समाजसेविओं द्वारा जोरदार ढंग से उठाया गया था। और सिटी मजिस्ट्रेट को जिलाधिकारी ने आदेशित किया था लेकिन आज 3 माह हो गए उन शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्रवाई आज तक नहीं की गई। चंद्राचार्य चौक से शंकर आश्रम की ओर जाने वाले रास्ते पर ज्वेलर्स और प्राइवेट दुकानों ने बैरिकेटिग लगाकर जगह पर अतिक्रमण कर किया हुआ है। जिसे पूर्व मे पुलिस ने हटवाया था। चंद्राचार्य चौक पर वरिष्ठ नागरिक कृष्णा गोपाल जो रोजाना नहर की पटरी पर टहलने निकलते थे, फुटपाथ ना होने के कारण सड़क पर चलते हुए दुर्घटना के शिकार हो गए, ऐसे अन्य बहुत मामले हैं जो फुटपाथ ना होने के कारण सड़क पर चलते वक्त दुर्घटनाओं में चोटिल हो चुके हैं। इतना सब होने के बावजूद भी जिला प्रशासन न जाने क्यों मौन है और फुटपाथ के अतिक्रमण के प्रति गंभीर क्यों नहीं ?

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