*गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ अनुपम उदाहरण*
आर.के.जोशी
नोहर। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व रहा है, जिसे आज भी समाज के जागरूक लोग निभा रहे हैं। इसी कड़ी में भामाशाह सुरेश पांडिया ने गुरु काशीनाथ जोशी से शिष्टाचार भेंट कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर सुरेश पांडिया ने गुरु काशीनाथ जोशी को शॉल एवं दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने आध्यात्मिक एवं ज्ञानवर्धक “कल्याण” पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान की, जिससे समाज में धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों का प्रसार हो सके। भेंट के दौरान गुरु काशीनाथ जोशी ने गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु ही व्यक्ति को सही मार्ग दिखाकर उसे संस्कारवान बनाते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में भी इस प्रकार से गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन समाज के लिए प्रेरणादायक है। इस अवसर पर अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे और सभी ने गुरु काशीनाथ जोशी का आशीर्वाद प्राप्त किया।










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