आईआईटी रुड़की के शिक्षकों ने जाना देश के पहले लेखक गांव का शैक्षणिक मॉडल

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पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ बोले- शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार

अमित कुमार

देहरादून। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एमएमटीटीपी) के तहत आयोजित पांच दिवसीय आवासीय ‘नर्चरिंग फ्यूचर लीडरशिप प्रोग्राम’ (एनएफएलपी) में शामिल देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने देश के पहले लेखक गांव का शैक्षणिक भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य, संस्कृति और नेतृत्व के विविध आयामों से परिचित कराना था। शिक्षकों ने लेखक गांव परिसर में स्थित नालंदा पुस्तकालय, शोध एवं अनुसंधान केंद्र, संजीवनी वाटिका, नक्षत्र वाटिका, विरासत भवन सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्हें इन संस्थानों की अवधारणा, भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी उनकी भूमिका और शैक्षणिक महत्व की जानकारी दी गई। भ्रमण के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने प्रतिभागी शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का प्रसार करने वाला नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का शिल्पकार होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्व का निर्माण करना है जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी हो। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, शोध और मानवीय मूल्यों के समन्वय का मार्ग प्रशस्त करती है।         डॉ. निशंक ने कहा कि लेखक गांव की स्थापना का उद्देश्य साहित्य, प्रकृति, संस्कृति और शिक्षा को एक ही परिसर में समाहित कर ऐसा सृजनात्मक वातावरण तैयार करना है, जहां से नए विचार, नई ऊर्जा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को दिशा मिल सके। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम, पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने लेखक गांव की अभिनव अवधारणा, शैक्षणिक वातावरण और भारतीय संस्कृति पर आधारित मॉडल की सराहना की। आईआईटी रुड़की के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स एवं कार्यक्रम निदेशक प्रो. नवीन कुमार नवानी ने कहा कि लेखक गांव शिक्षा, साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का एक प्रभावी मंच है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण प्रतिभागियों को कक्षा से बाहर सीखने का अवसर देते हैं और उनके शिक्षण एवं नेतृत्व कौशल को समृद्ध बनाते हैं। भ्रमण के बाद प्रतिभागियों ने लेखक गांव को शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम बताते हुए इसे देश के लिए एक प्रेरणादायी शिक्षण मॉडल की संज्ञा दी।

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