देशभर में होगा अमर शहीद जगदीश वत्स का यशोगान : जितेंद्र रघुवंशी
अमित कुमार
हरिद्वार। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के अनुरोध पर जिला प्रशासन की ओर से अमर शहीद जगदीश वत्स की 101वीं जयंती देशभक्ति के वातावरण में शहीद जगदीश वत्स पार्क, जटवाड़ा पुल, ज्वालापुर में ऐतिहासिक स्तर पर मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने ध्वजारोहण कर किया। इसके बाद वंदे मातरम् और राष्ट्रगान हुआ। मुख्य अतिथि मदन कौशिक, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, स्वामी शरद पुरी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के अध्यक्ष देशबंधु और महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने शहीद जगदीश वत्स की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेश मोहन ने किया। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और मोतियों की माला पहनाकर स्वागत किया गया। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने उपस्थित स्वतंत्रता सेनानी और शहीद परिवारों को अंगवस्त्र व मोतियों की माला पहनाकर सम्मानित किया।
देशभर में होगा शहीद जगदीश वत्स का यशोगान
स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने शहीद जगदीश वत्स की जयंती प्रतिवर्ष मनाने की सहमति दी है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों ने असंख्य यातनाएं सहीं और अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और शहीद परिवारों के वंशज देशभक्ति की उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।रघुवंशी ने अंडमान स्थित सेल्युलर जेल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक भारतीय को एक बार अवश्य सेल्युलर जेल देखना चाहिए, ताकि यह महसूस किया जा सके कि देश की आजादी के लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी यातनाएं सही थीं। उन्होंने असम में शहीद कुशल कुंवर की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि शहीदों की गाथाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए देशभर में प्रयास किए जा रहे हैं।
17 वर्ष की उम्र में देश के लिए दे दिया बलिदान
जितेंद्र रघुवंशी ने शहीद जगदीश वत्स के जीवन और बलिदान की गाथा सुनाते हुए कहा कि ग्राम खजूरी अकबरपुर, जनपद सहारनपुर निवासी जगदीश प्रसाद वत्स ने ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, हरिद्वार में शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन से प्रभावित होकर ऋषिकुल और गुरुकुल के विद्यार्थियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया।
जुलूस के दौरान सुभाष घाट, डाकघर और रेलवे स्टेशन पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया। रघुवंशी ने बताया कि सुभाष घाट पर पुलिस की गोलीबारी में जगदीश वत्स के पैर में गोली लगी। उन्होंने अपनी धोती फाड़कर घाव पर बांधी और आगे बढ़ते हुए डाकघर पर तिरंगा फहराया। वहां भी उन्हें गोली लगी। इसके बाद वह रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां भी तिरंगा फहराया। पुलिस की गोली उनके सीने में लगी और वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर देहरादून पहुंचाया, जहां उचित चिकित्सा के अभाव में उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उस समय उनकी आयु मात्र 17 वर्ष थी।
राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाएगी जयंती : मदन कौशिक
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि देश उन क्रांतिकारियों का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने अपने बलिदान से भारत को आजादी दिलाई। उन्होंने कहा कि आज हम जिन स्वतंत्रताओं का आनंद ले रहे हैं, वह शहीदों के बलिदान का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीद परिवारों के सम्मान और हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। आने वाले समय में शहीद जगदीश वत्स की जयंती को जिला स्तर के साथ-साथ प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भी मनाने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने शहीद जगदीश वत्स की यशगाथा को याद करते हुए कहा कि उनका देशभक्ति का मार्ग आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों को अंगवस्त्र, मोतियों की माला और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। ‘हरित हरिद्वार’ अभियान के तहत अतिथियों और उपस्थित लोगों को तुलसी एवं फलदार पौधे भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार, हरित ऋषि विजय पाल बघेल, सुरेश चंद्र सुयाल, वरिष्ठ पत्रकार शशि शर्मा, रजनीकांत शुक्ला, चेतना पथ के संपादक अरुण पाठक, जगदीश लाल पाहवा, देशबंधु, डॉ. वेदप्रकाश आर्य और यशपाल सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे। कार्यक्रम के आयोजन में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलौत, आदित्य प्रकाश उपाध्याय, वीरेंद्र गहलौत, अशोक चौहान, राकेश चौहान, प्रमेश कुमार, दीपेश कुमार, कमल छाबड़ा, अर्जुन सिंह राणा, यशपाल सिंह, ऋषभ गहलौत, कैलाश वैष्णव, मंजुलता उपाध्याय, मंजुलता भारतीय, शोभा गोयल, मनीषा चौहान, राजकुमारी सैनी सहित सेनानी परिवारों के युवाओं ने सहयोग किया।












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