हरिद्वार नगर निगम का अनोखा नवाचार, कांवड़ मेले में ‘स्मार्ट सोलर बिन’ का सफल ट्रायल

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सेंसर से खुद खुलेगा ढक्कन, सोलर ऊर्जा से चलेगा और स्वयं करेगा कचरे का कॉम्पैक्शन

अमित कुमार 

हरिद्वार। स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए नगर निगम हरिद्वार ने एक अभिनव पहल की है। नगर आयुक्त आईएएस नंदन कुमार के निर्देश पर नगर निगम ने जे.डी.ई. वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से अत्याधुनिक ‘स्मार्ट सोलर सेंसर कॉम्पैक्ट बिन’ तैयार कराया है। वर्तमान में इसका ट्रायल कांवड़ पटरी पर किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु इसका उपयोग कर रहे हैं।

यह स्मार्ट डस्टबिन सामान्य डस्टबिन से पूरी तरह अलग है। इसमें सेंसर आधारित ऑटोमैटिक ओपनिंग सिस्टम लगाया गया है। जैसे ही कोई व्यक्ति इसके सामने पहुंचता है, इसका ढक्कन स्वतः खुल जाता है और कचरा डालने के बाद अपने आप बंद हो जाता है। इससे बिना किसी स्पर्श के स्वच्छ और सुरक्षित उपयोग संभव हो रहा है।इस स्मार्ट बिन की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऑटोमैटिक कचरा कॉम्पैक्शन सिस्टम है। कचरा डालते ही यह उसे स्वतः दबाकर कम स्थान में अधिक मात्रा में संग्रहित कर देता है। इससे डस्टबिन जल्दी नहीं भरता, बार-बार खाली करने की आवश्यकता कम होती है और सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है। पूरी तरह सोलर ऊर्जा से संचालित यह डस्टबिन बाहरी बिजली पर निर्भर नहीं है। इसकी मजबूत संरचना ऐसी बनाई गई है कि आवारा पशु इसे गिरा नहीं सकते और न ही इसमें मुंह डालकर कचरा फैला सकते हैं। इससे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलने की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण मिलेगा।

नगर निगम के अनुसार कांवड़ मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु इस स्मार्ट बिन का उपयोग कर रहे हैं। ट्रायल के शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं और श्रद्धालुओं ने भी इस तकनीकी पहल की सराहना की है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है तो आगामी चरण में नगर के प्रमुख बाजारों, घाटों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी ऐसे स्मार्ट सोलर बिन स्थापित किए जाएंगे। ट्रायल के दौरान उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, मुख्य सफाई निरीक्षक सुनील मलिक, मुख्य सफाई निरीक्षक संजय शर्मा, सफाई निरीक्षक श्रीमती रूपाली सहित नगर निगम की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने स्मार्ट बिन की कार्यप्रणाली का निरीक्षण करते हुए इसकी उपयोगिता का परीक्षण किया। नगर निगम हरिद्वार का यह नवाचार स्वच्छता प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल कचरा संग्रहण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, बल्कि स्वच्छ, सुंदर, तकनीक-सक्षम और पर्यावरण अनुकूल हरिद्वार के निर्माण को भी नई गति मिलेगी।

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