राज्य आंदोलन की भावनाओं से भटकने, बढ़ते पलायन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल
रमेश राम
लोहाघाट/चम्पावत। उत्तराखंड की राजनीति, विकास और राज्य निर्माण के उद्देश्यों को लेकर सामाजिक चिंतक रमेश राम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य गठन के मूल उद्देश्यों से आज उत्तराखंड काफी दूर होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से सत्ता में रही प्रमुख राजनीतिक पार्टियां जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकीं और राज्य में भ्रष्टाचार, पलायन तथा बेरोजगारी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती गईं। रमेश राम ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनेक आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी और हजारों लोगों ने लंबे संघर्ष के बाद पृथक राज्य का सपना साकार किया था। लोगों को उम्मीद थी कि राज्य बनने के बाद विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार होगा, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य से बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ है, अनेक गांव खाली हो गए हैं और युवा आज भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार, खनन, शराब, भूमि और ठेकेदारी से जुड़े माफियाओं का प्रभाव बढ़ा है, जबकि आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। रमेश राम ने यह भी कहा कि चुनावों में धनबल और बाहुबल का प्रभाव बढ़ने से सामान्य एवं ईमानदार उम्मीदवारों के लिए मुकाबला करना कठिन हो गया है। उनके अनुसार क्षेत्रीय दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की स्थिति भी लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां समय-समय पर सत्ता में रहीं, लेकिन जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी और जवाबदेह शासन स्थापित नहीं कर सकीं। उन्होंने राजनीतिक दलों से राज्य आंदोलन की मूल भावना के अनुरूप कार्य करने तथा उत्तराखंड के विकास, रोजगार, शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों के पुनर्जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।












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