पटना रैली के बाद बोले कानू विकास संघ, गया के अध्यक्ष—कानू और हलवाई समाज अलग, अधिकारों से समझौता नहीं होगा
पी.के.गुप्ता
गयाजी। कानू विकास संघ, गया के अध्यक्ष शंकर कुमार कानू ने पटना में आयोजित कानू-हलवाई रैली को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि कानू समाज का उपयोग केवल भीड़ जुटाने के लिए किया गया और समाज को केवल “लॉलीपॉप” दिखाने का प्रयास हुआ। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष के आग्रह पर वह रैली में शामिल हुए थे। हालांकि, समाज के कई वरिष्ठजनों और अभिभावकों ने उन्हें वहां जाने से मना किया था, लेकिन वे स्वयं वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से कार्यक्रम में पहुंचे। शंकर कुमार कानू ने कहा कि रैली के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि मुख्यमंत्री के समक्ष हलवाई समाज का बहुमत प्रदर्शित करने की कोशिश की गई। उनका आरोप है कि उन्हें मंच से अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कानू और हलवाई दो अलग-अलग समाज हैं तथा दोनों का विलय उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्वारा मंच से कानू और हलवाई समाज को एक साथ जोड़ने की घोषणा का उन्होंने वहीं मंच पर और बाद में मीडिया के समक्ष भी विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि कानू समाज के अधिकारों और पहचान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शंकर कुमार कानू ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कानू समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन, धरना, घेराव और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बिहार के कानू समाज से एकजुट होकर इस संघर्ष में साथ देने की अपील की।।उन्होंने बताया कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री को समाज की पांच प्रमुख मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कानू समाज की जनसंख्या लगभग 30 लाख तथा हलवाई समाज की जनसंख्या लगभग 6 लाख है। अंत में उन्होंने समाज की एकता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा, “जय बाबा कंगाली बघौत।”












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