एक श्रावण, दो बार कांवड़… शिवभक्ति में फिर निकला दंपति

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शहजाद से शंकर और रजिया से सावित्री बने दंपति का संकल्प—शिवरात्रि पर अपनी जन्मभूमि में करेंगे भोलेनाथ का जलाभिषेक

चंडीघाट के ब्रह्मकुंड से वैदिक विधि-विधान के साथ उठाया गंगाजल, संतों से लिया आशीर्वाद।

1 अगस्त को भी उठाई थी कांवड़, अब दूसरी बार हरिद्वार से बहेड़ी गुर्जर तक शुरू की पैदल यात्रा

 

अमित कुमार

हरिद्वार। श्रावण मास की शिवभक्ति के बीच हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से एक दंपति ने एक बार फिर कांवड़ यात्रा शुरू की। पूर्व में शहजाद और रजिया के नाम से पहचाने जाने वाले दंपति अब शंकर और सावित्री नाम से सनातन परंपरा के अनुसार जीवन जीने की बात कहते हैं। दोनों ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ गंगाजल का पूजन किया और अपनी जन्मभूमि बहेड़ी गुर्जर के लिए रवाना हुए। दंपति ने संकल्प लिया है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले दंपति ने तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज से आशीर्वाद लिया। उनके मार्गदर्शन में पंडितों ने वैदिक रीति-रिवाज से गंगाजल का पूजन कराया। इस दौरान हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री सहित कई संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे। इसके बाद दंपति ने बाबा हठयोगी महाराज से भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

एक ही श्रावण में दूसरी बार उठाई कांवड़

दंपति की इस यात्रा की खास बात यह है कि दोनों इसी श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ लेकर निकले हैं। इससे पहले 1 अगस्त को आयोजित एक्स-मुस्लिम कांवड़ यात्रा में शामिल होकर दोनों ने हरिद्वार से गंगाजल उठाया था। इसके बाद 3 अगस्त को गाजियाबाद पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। अब दोनों ने दोबारा हरिद्वार से कांवड़ उठाई है और बहेड़ी गुर्जर पहुंचकर शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने का संकल्प लिया है।

आस्था और स्वतंत्र इच्छा का सम्मान जरूरी: संत राम विशाल दास

तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में व्यक्ति की श्रद्धा और स्वतंत्र इच्छा का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी आस्था, स्वतंत्र इच्छा और पूर्वजों की संस्कृति के प्रति जुड़ाव के आधार पर सनातन मार्ग अपनाता है, उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवभक्ति के साथ यह दंपति अपनी जन्मभूमि में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के संकल्प के साथ यात्रा पर निकला है। यह उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने दंपति के सुखमय जीवन और मंगलमय यात्रा की कामना की।

दूसरी बार कांवड़ उठाना भावनात्मक अनुभव: शंकर

शंकर ने कहा कि सनातन परंपरा में उन्हें पूजा-पद्धति, संस्कार और अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप जीवन जीने का अनुभव मिला है। श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ लेकर निकलना उनके लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि वे अपने गांव बहेड़ी गुर्जर पहुंचकर शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने लोगों से अपनी जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों के इतिहास को समझने का प्रयास करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने दंपति को मंगलमय कांवड़ यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं और भगवान शिव से उनके संकल्प की पूर्ति तथा सुख-समृद्धि की कामना की।

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