अंगदान जीवन का सबसे अनमोल उपहार, जागरूकता से बच सकती हैं कई जिंदगियां

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विश्व अंगदान दिवस पर लोगों से भ्रांतियां दूर कर अंगदान का संकल्प लेने की अपील

विवेक शर्मा

नई दिल्ली। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर लोगों से अंगदान के प्रति जागरूक होने और जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने के लिए अंगदान का संकल्प लेने की अपील की गई। प्रत्येक वर्ष 13 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व अंगदान दिवस का उद्देश्य समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक अंगदाता कई जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यकृत, गुर्दा, हृदय, अग्न्याशय, आंत, हृदय वाल्व और नेत्र जैसे अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में अंगदान किसी जरूरतमंद के लिए जीवन का सबसे अनमोल उपहार साबित हो सकता है।

भ्रांतियों को दूर करना जरूरी

अंगदान को लेकर समाज में आज भी कई तरह के मिथक और भ्रांतियां प्रचलित हैं। इनमें धर्म द्वारा अंगदान की अनुमति न देना, अंग निकालने के बाद शरीर के विकृत हो जाने, किडनी दान के बाद कमजोरी या आजीवन दवाइयों की आवश्यकता तथा अधिक उम्र में अंगदान नहीं कर पाने जैसी धारणाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान के लिए पात्रता का निर्णय संबंधित चिकित्सा विशेषज्ञ आवश्यक स्वास्थ्य जांच के बाद करते हैं। इसलिए लोगों को अपुष्ट जानकारी के बजाय चिकित्सकीय विशेषज्ञों से सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

ब्रेन डेथ में अंगदान का विशेष महत्व

ब्रेन डेथ की स्थिति में अंगदान का विशेष महत्व होता है। इस स्थिति में मस्तिष्क की सभी क्रियाएं स्थायी रूप से बंद हो जाती हैं, जबकि चिकित्सकीय एवं कृत्रिम सहायता से हृदय की धड़कन कुछ समय तक जारी रह सकती है। निर्धारित चिकित्सीय प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत इस स्थिति में कई अंगों को प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किया जा सकता है। वहीं मृत्यु के बाद सीमित समय के भीतर कॉर्निया का उपयोग भी संभव हो सकता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अंगदान पूरी तरह स्वैच्छिक निर्णय है और किसी व्यक्ति पर इसके लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। लोगों से अपील की गई कि वे जीवनकाल में ही अंगदान का संकल्प लें और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसकी जानकारी दें, ताकि जरूरत पड़ने पर परिवार उनके निर्णय से अवगत रहे।

NOTTO में पंजीकरण की प्रक्रिया

यदि किसी व्यक्ति को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता है तो उसे लाइसेंस प्राप्त अंग प्रत्यारोपण केंद्र से संपर्क कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए। इसके साथ ही NOTTO (National Organ & Tissue Transplant Organization) के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। डॉ. संजीव गुलाटी, अध्यक्ष, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी प्रत्यारोपण विभाग, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल तथा इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष ने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने और भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। जागरूकता के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित किया जा सकता है, जिससे प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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