विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को नमन, यह दिन लाखों परिवारों के दर्द और बलिदान को याद करने का अवसर: धामी

Spread the love

अमित कुमार

हरिद्वार। उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से प्रेम नगर आश्रम में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और विभाजन का दंश झेलने वाले परिवारों के संघर्ष एवं बलिदान को नमन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पगड़ी पहनाकर एवं त्रिशूल भेंट कर स्वागत के साथ हुई। इस दौरान पंजाबी समाज के लोगों ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी विस्थापन था। सदियों से साथ रहने वाले लोग रातों-रात एक-दूसरे से अलग हो गए और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस पीड़ादायक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि वे देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के महत्व को समझ सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इसका उद्देश्य विभाजन से प्रभावित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी को इस त्रासदी से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से फिर जुड़ रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी विरासत को दिव्यता और भव्यता के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है।

दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सरकार विकास के साथ उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रक्तदान शिविर का निरीक्षण किया और रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने विभाजन विभीषिका पर लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को मुख्यमंत्री ने शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

रेडक्लिफ को सीमा निर्धारण की जिम्मेदारी देना बड़ी विडंबना : त्रिवेंद्र

हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 तक भारत अखंड था और मध्यरात्रि के बाद देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय बड़ी विडंबना यह थी कि देश का बंटवारा हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी अंग्रेज अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को सौंपी गई थी। सांसद ने कहा कि जिस व्यक्ति को भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी तक नहीं थी, उसे इतने बड़े और संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपना विभाजन की प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में मेयर हरिद्वार किरण जैसल, नगर पालिका शिवालिक नगर के अध्यक्ष राजीव शर्मा, विधायक आदेश चौहान एवं सविता कपूर, उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष करण मल्होत्रा, प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला, जिला चेयरमैन प्रमोद पांधी, जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राज ओबराय, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा, जिला महामंत्री प्रदीप कालरा, राम अरोड़ा, राज्य मंत्री विश्वास डाबर, नितिन गौतम, आदेश सैनी, देशराज कर्णवाल, सुनील सैनी, शोभाराम प्रजापति, महंत लोकेश दास, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार सहित विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के पदाधिकारी एवं समाज के लोग मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *