‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की थीम पर 24 अगस्त से चार दिवसीय आयोजन, देशभर से जुटेंगे करीब 50 कलाकार
डॉ. सुशील उपाध्याय
देहरादून। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की थीम पर आधारित चार दिवसीय लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन 24 से 27 अगस्त तक किया जाएगा। आयोजन में देश की समृद्ध लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं के साथ राष्ट्रभावना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को कलात्मक अभिव्यक्ति दी जाएगी। कार्यशाला एवं चित्रकला प्रतियोगिता में करीब 50 कलाकार प्रतिभाग करेंगे।कार्यशाला के कोर्डिनेटर डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोक एवं जनजातीय कला को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक कला विधाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना है। ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की केंद्रीय थीम के अनुरूप कलाकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा, प्रकृति, लोकजीवन और राष्ट्रप्रेम के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करेंगे।उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों और कला विधाओं से जुड़े करीब 50 कलाकार कार्यशाला में हिस्सा लेंगे। कलाकार अपनी विशिष्ट शैलियों में चित्रों एवं अन्य कलाकृतियों का सृजन करेंगे। आयोजन में देश की विविध कला शैलियों, तकनीकों और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही कलाकारों को एक-दूसरे की कला परंपराओं को समझने और सीखने का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि लोक एवं जनजातीय कलाएं भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृति और परंपराओं की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इनमें स्थानीय जीवन, रीति-रिवाज, प्रकृति, धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताओं तथा सामुदायिक अनुभवों की झलक मिलती है। ऐसे आयोजन कलाकारों को व्यापक मंच देने के साथ आमजन और युवा पीढ़ी को इन पारंपरिक कला विधाओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता में निहित है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों की लोक एवं जनजातीय कलाओं की अपनी विशिष्ट पहचान है, लेकिन सभी में भारतीय संस्कृति की साझा भावना दिखाई देती है। ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की थीम के माध्यम से इसी सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभावना को कलात्मक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदर्शनी में दिखेगी लोक कला की विविधता
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद करमाकर ने बताया कि आयोजन के दौरान लोक एवं जनजातीय कला पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें कार्यशाला के दौरान कलाकारों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आमजन के लिए यह प्रदर्शनी भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को करीब से देखने और समझने का अवसर प्रदान करेगी।
कैनवास पर दिखेगी राष्ट्रभावना
चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगी। प्रतियोगिता में प्रतिभागी ‘वन्दे मातरम्’ की भावना, उसके ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण को अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से कैनवास पर उकेरेंगे। कलाकारों की रचनाओं में देश की सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता चेतना, मातृभूमि के प्रति सम्मान और भारतीय जीवन मूल्यों की झलक देखने को मिलेगी। कार्यशाला में कलाकारों के बीच संवाद एवं कला तकनीकों के आदान-प्रदान पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अनुभवी कलाकार अपनी कला की बारीकियां और तकनीकें प्रतिभागियों के साथ साझा करेंगे। इससे प्रतिभागियों को पारंपरिक कला शैलियों को समझने के साथ अपनी रचनात्मकता को नए आयाम देने का अवसर मिलेगा।
विश्वविद्यालय में तैयारियां पूरी
डॉ. आनंद करमाकर ने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तबस्सुम नकवी के निर्देशन में आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. मंदाकिनी शर्मा और डॉ. नीलोत्पल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। चार दिवसीय आयोजन कला, संस्कृति और राष्ट्रभावना का संगम प्रस्तुत करेगा। कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा, वहीं दर्शकों को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की समृद्ध परंपराओं से रूबरू होने का अवसर प्राप्त होगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह पहल पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के साथ युवा कलाकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी। ‘वन्दे मातरम्–150 वर्ष’ की थीम पर आधारित यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध रंगों को एक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।











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