मेलाधिकारी द्वारा बुलाई गई अखाड़े की समन्वय बैठक से आठ अखाड़ों ने बनाई दूरी

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*गुटबाजी के चलते बैठक को लगा ग्रहण*

डॉ. हिमांशु द्विवेदी

हरिद्वार। मेला अधिष्ठान द्वारा अखाडों की बैठक को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। क्या पांच अखाड़े ही अर्ध कुंभ को कुंभ मेले की तर्ज पर दिव्य भव्य रूप देने और 500 करोड़ के बजट को ठिकाने लगाएंगे। अब इससे साफ हो गया कि इस विफल बैठक का ठीकरा मेला अधिकारी के सिर पर फूटने से इंकार नही किया जा सकता। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से संबंध रखने वाले 13 अखाड़ों और मेला अधिष्ठान की आयोजित पहली बैठक को ग्रहण लग गया। अखाड़ों में गुटबाजी ,परस्पर समन्वय, संवाद के अभाव के चलते अखाड़ा परिषद के आठ अखाड़ों ने आज की आहुत बैठक में भाग नहीं लिया। पूर्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आमंत्रण पर सभी अखाड़ों ने बैठक में उपस्थित होकर सहयोग करने का आश्वासन, आशीर्वाद मुख्यमंत्री को दिया था।तब मेला अधिष्ठान ने सभी अखाड़ों को व्यक्तिगत निमंत्रण भेजा था, जिसमें सभी अखाड़ों ने प्रतिभाग किया था। लेकिन पूर्व से ही अखाड़ा परिषद दो गुटों में बटा हुआ है। लिहाजा मेला अधिष्ठान द्वारा निमंत्रण भेजने की फिर चूक आज भारी पड़ गई और 8 अखाड़ों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। आज की बैठक में निरंजनी अखाड़ा, जूना, आव्हान, अग्नि व आनंद अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने ही भाग लिया। शेष अखाड़ों के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण कुर्सियां खाली पड़ी रही। हालांकि अखाड़ा परिषद के एक गुट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पूरी महाराज, महामंत्री महंत हरि गिरी महाराज की अगुवाई में मेला अधिकारी सोनिका सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने संतों से परामर्श कर बेहतर व्यवस्थाओं पर चर्चा की। लेकिन आधी- अधूरी बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। वहीं कोरम के अभाव व आठ अखाड़ों के साधु- संतों की अनुपस्थिति के कारण बैठक बेनूर दिखाई दी। अब फिर 13 अखाड़ों के साथ मुख्यमंत्री समन्वय बनाकर शायद कोई हल निकाल सके ?

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