वन आरक्षी को अवैध खनन में घोर लापरवाही बरतने पर किया निलंबित

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एम. पारिक

हरिद्वार। लक्सर रेंज के भोगपुर दक्षिणी बीट में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के मामले में वन विभाग ने आखिरकार बड़ी कार्रवाई करते हुए वन आरक्षी वैभव सिंघल को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में उनके कार्यक्षेत्र में भारी पैमाने पर खनन होने और उसे रोकने में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद डीएफओ ने सख्त कदम उठाते हुए वन कर्मी के निलंबन के बुधवार को आदेश जारी किए। कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वन विभाग की जांच में सामने आया कि भोगपुर दक्षिणी बीट के अलग-अलग स्थानों पर करीब 328.304 घनमीटर अवैध खनन किया गया। आरोप है कि बीट में तैनात वन आरक्षी वैभव सिंघल ने इस अवैध गतिविधि को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे खनन माफिया बेखौफ होकर क्षेत्र में सक्रिय रहे। बताया जा रहा है कि विभाग को लगातार अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें वन आरक्षी की गंभीर लापरवाही सामने आई। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी की संस्तुति के बाद निलंबन का आदेश जारी किया गया। डीएफओ स्वपलिन अनिरुद्ध ने बताया कि भोगपुर दक्षिणी बीट में अवैध खनन के मामले को विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि जांच में यह पाया गया कि संबंधित वन आरक्षी द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरती गई। अवैध खनन को रोकने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जो कि उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसलिए अनुशासन एवं अपील नियमावली 2003 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले में आगे विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।निलंबन अवधि के दौरान वैभव सिंघल का मुख्यालय उप वन प्रभाग कार्यालय रुड़की निर्धारित किया गया है। विभागीय स्तर पर इस मामले की गहन जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध खनन के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पहले भी मांगा गया था जवाब
लक्सर रेंज अधिकारी महेंद्र गिरी ने बताया कि 28 जनवरी 2026 को वन आरक्षी वैभव सिंघल से अवैध खनन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। बावजूद इसके क्षेत्र में खनन गतिविधियां थमने के बजाय जारी रहीं। जांच में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद विभाग ने आखिरकार निलंबन की कार्रवाई की गई है, साथ ही पट्टा धारक नंदकिशोर के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज की गई है मामले में अग्रिम जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि विभाग को लगातार अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें वन आरक्षी की गंभीर लापरवाही सामने आई। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी की संस्तुति के बाद निलंबन का आदेश जारी किया गया। डीएफओ स्वपलिन अनिरुद्ध ने बताया कि भोगपुर दक्षिणी बीट में अवैध खनन के मामले को विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि जांच में यह पाया गया कि संबंधित वन आरक्षी द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरती गई। अवैध खनन को रोकने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जो कि उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसलिए अनुशासन एवं अपील नियमावली 2003 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले में आगे विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।निलंबन अवधि के दौरान वैभव सिंघल का मुख्यालय उप वन प्रभाग कार्यालय रुड़की निर्धारित किया गया है। विभागीय स्तर पर इस मामले की गहन जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध खनन के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

 

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