*भारतीय नवसंवत पर काव्य गोष्ठी एवं विचार गोष्ठी का आयोजन*
सुमेर सिंह
जयपुर। भारतीय नव संवत के अवसर पर गुरु नानक भवन संस्थान आदर्श नगर,जयपुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से विचार गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद रमाकांत शर्मा ने कहा कि भारतीय नव वर्ष के अवसर पर हमें एक दूसरे को शुभकामना संदेश देने के साथ-साथ शाम को दीप मालिका एवं परिवार के सदस्यों के साथ उत्सव पूर्वक मनाना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिन्दी व राजस्थानी गीतकार एवं बाल साहित्यकार डॉ. शिवराज भारतीय ने भारतीय नव वर्ष की ऐतिहासिकता एवं काल गणना की जानकारी देते हुए इसके सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला ।राजस्थान – स्थापना दिवस अवसर पर मातृभाषा बाबत उन्होंने कहा कि हमे पढ़ने – लिखने एवं अपने घर के सदस्यों के साथ बातचीत करने में अधिकाधिक मातृभाषा का ही उपयोग करना चाहिए । हम बच्चों के साथ मातृभाषा नहीं बोलेंगे तो आने वाली पीढी एक भाषा से वंचित रह जाएगी । इस अवसर पर उन्होने राजस्थानी गीत ‘ममता रो मिंदर मां ‘ भी गुनगुनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खुशालचन्द खत्री ने भी भारतीय नववर्ष व मातृभाषा के महत्व की चर्चा करते हुए अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की बात कही। इस अवसर पर कवयित्री नलिनी शर्मा ने ‘बसंत ‘ शीर्षक गीत पढा व निरंतर सृजनरत रहने की बात कही। कार्यक्रम में राजेश दायमा, अशोक कुमार, विनोद कुमार गढवाल वर्षा बंसल, अनुराधा, कमलेश शर्मा, चेतराम मीणा, मयंक चौधरी सहित अनेक शिक्षाविद साथियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों को डॉ. शिवराज भारतीय द्वारा रचित समरसता के संवाहक बाबा रामदेव के जीवन पर आधारित ‘सबद सवामणी ‘ भेंट की गई व संस्थान को हिन्दी व राजस्थानी कृतियां ‘गीत वतन के गाएंगे ‘ व ‘सेळभेळ ‘ भेंट की गई ।











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