आर.के.जोशी बीकानेर। मां सरस्वती वेद आश्रम में बसंत पंचमी के उपलक्ष में मां सरस्वती का पूजन किया गया आश्रम में ब्राह्मणों द्वारा सरस्वती स्तोत्र के पाठ किए गए एवं हवन किया गया अध्यक्ष पंडित मुरलीधर पुरोहित ने बताया कि जीवन की नवचेतना का पर्व वसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि जीवन में नवसृजन और आशा के आगमन का उत्सव है। जैसे जाड़े की कठोरता के बाद धरती पीले फूलों से मुस्कराने लगती है, वैसे ही जीवन की कठिनाइयों के बाद मन में नई उमंगें अंकुरित होती हैं। जीवन की नवचेतना का पर्व वसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि जीवन में नवसृजन और आशा के आगमन का उत्सव है। जैसे जाड़े की कठोरता के बाद धरती पीले फूलों से मुस्कराने लगती है, वैसे ही जीवन की कठिनाइयों के बाद मन में नई उमंगें अंकुरित होती हैं। हम बसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं क्योंकि यह समृद्धि, सकारात्मकता और वसंत ऋतु की जीवंत ऊर्जा का प्रतीक है, ठीक वैसे ही जैसे खिलते हुए सरसों के खेत। यह रंग देवी सरस्वती से भी जुड़ा है, जो ज्ञान, बुद्धि और विद्या का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस अवसर पर आश्रम को पीले फूलों से सजाया गया। सरस्वती पूजा के दौरान राकेश बिस्सा, उमेश, सुरेश, संतोष कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
माँ सरस्वती का विधि विधान एवं मंत्रोचार से किया गया पूजन











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