“4 साल बेमिसाल” कार्यक्रम पर उठे सवाल बैरागी कैंप की सभा में अपेक्षा से कम भीड़ बना चर्चा का विषय

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डॉ. हिमांशु द्विवेदी

हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार के “जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल” कार्यक्रम को लेकर शनिवार को बड़ा आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में भाजपा के दिग्गज नेता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। सरकारी विज्ञप्तियों और प्रचार-प्रसार में इस कार्यक्रम को बेहद भव्य और विशाल बताया गया था तथा पार्टी द्वारा दावा किया गया था कि इसमें लगभग डेढ़ लाख कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने इस दावे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

*पंडाल की क्षमता और वास्तविक भीड़ पर चर्चा*

कार्यक्रम स्थल पर आगे के हिस्से में लगभग 6000 लोगों के लिए वीआईपी व्यवस्था की गई थी, जहां, 800सोफे और आरामदायक कुर्सियां लगाई गई थीं। इसके अलावा लगभग 90 हजार लोगों के बैठने के लिए प्लास्टिक कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। बैठने की व्यवस्था को चौकोर खंडों में विभाजित किया गया था, जिनमें प्रत्येक खंड में लगभग एक-एक हजार कुर्सियां लगाई गई थीं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खाली पड़ी कुर्सियों की तस्वीरों और वीडियो में पंडाल के कई हिस्से खाली दिखाई दिये जिसे पत्रकारों ने अपने कैमरों में कैद किया ताकि बाद में असलियत सामने ला सकें।

*इन दावों के अनुसार कार्यक्रम में अनुमानित संख्या के मुकाबले काफी कम लोग पहुंचे।*

वहीं कार्यक्रम स्थल से लोग जाते दिखाई दे रहे थे। दावा किया गया कि अधिकारियों और व्यवस्थापकों द्वारा लोगों से बैठने का अनुरोध भी बार- बार किया जा रहा था, लेकिन कई लोग कार्यक्रम स्थल से निकलते नजर आए। हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि हम नही करते है । लेकिन तस्वीरें तो बोलती है उन्हे झुठलाया नही जा सकता। फिर भी यह चर्चा पूरे दिन सोशल मीडिया पर चलती रही। अब व्यवस्थाओं की बात करें तो इतने बड़े कार्यक्रम में अव्यवस्था होना ही लाजमी है

*पानी और भोजन व्यवस्था पर भी उठे सवाल*

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की टिप्पणियां सामने आईं। कुछ लोगों ने दावा किया कि पंडाल के भीतर पानी की कमी महसूस की गई और लोग खाली बोतलों में पानी ढूंढते नजर आए। आप देख सकते है एक महिला खाली बोतलों में पानी तलाशती दिखाई दी। इसी तरह भोजन वितरण को लेकर भी कुछ वीडियो सामने आए जिनमें भोजन के पैकेट लेने को लेकर भीड़ में हलचल दिखाई दी। कुछ लोगों को अधिक पैकेट मिलने और कुछ को न मिलने की बातें भी चर्चा में रहीं। वहीँ नाबालिग बच्चों की मौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय। कार्यक्रम की तस्वीरों में कुछ नाबालिग बच्चे भी दिखाई दिए जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लिए खड़े नजर आए। इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग एक जैसी यूनिफॉर्म पहने दिखाई दिए इससे स्पष्ट होता है कि किसी कारखाने के कर्मचारियों को भी रैली में पहुंचने के निर्देश दिए गए होंगे

*भाषण में ‘9 साल’ का उल्लेख बना चर्चा का केंद्र*

कार्यक्रम का शीर्षक “4 साल बेमिसाल” था, लेकिन अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र सरकार के 9 वर्षों के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र किया। राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई कि कार्यक्रम राज्य सरकार के चार वर्षों पर केंद्रित था, जबकि भाषण में व्यापक रूप से केंद्र सरकार के नौ वर्षों के कार्यों का उल्लेख किया गया। उसी के साथ त्रिवेंद्र सिंह रावत के भाषण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम तक नहीं यह भी एक चर्चा का विषय बना रहा। कुल मिलाकर सरकारी आंकड़े तो बताते हैं कि कार्यक्रम सफल रहा, लेकिन अवस्थाओं का बोलबाला रहा। वही कार्यक्रम पर हुए मोटे खर्चे पर भी आम जनों में चर्चा का विषय दिनभर बना रहा।

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