आर. के. जोशी
राजस्थान। आश्रम प्रवक्ता राकेश बिस्सा ने बताया कि इस कार्यक्रम में कुल 21 बटुकों का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से किया गया। आश्रम अधिष्ठाता पंडित मुरलीधर पुरोहित ने कहा कि बटुकों ने सबसे पहले हवन किया और कांशी पढने जाने हेतु संकल्प लिया। इसी बीच में बटुकों के मामा द्वारा बटुकों को मान मुन्नवार करके वापिस मनाया गया। बटुकों ने सबसे अपने परिवार वालों से भिक्षा मांगकर उसे अपने गुरु को सौंपा गया। गुरु द्वारा सभी बटुकों को कान में गुरु मंत्र दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंचांगकर्ता ज्योतिष आचार्य पंडित राजेंद्र किराडू थे उन्होंने बटुकों को जनेऊ की महत्ता को बताते हुए कहा कि इसमें तीन धागे होते हैं जो सत्व रज और तम तीनों गुणों अर्थात ब्रह्मा विष्णु और महेश का प्रतीक है। कान पर जनेऊ धारण करने से सूर्य नाड़ी जागृत होती है। जनेऊ बुरे कर्म से बचाती है। जनेऊ धारण करने से बालक गायत्री जपने का अधिकारी होता है और इससे उसकी आयु बढ़ती है। इस कार्यक्रम में लक्ष्मी नारायण पुरोहित एवं उनकी धर्मपत्नी पुष्पा पुरोहित ने सभी बटुकों को अपनी तरफ से भेंट दी। इस अवसर पर पंडित उमेश, पंडित सुरेश, पंडित संतोष व्यास, पंडित श्रीलाल, पंडित नवरतन, हंसराज किराडू, मदन पुरोहित के साथ मीनाक्षी, माया, जमना, संतोष, यामिनी, अंजलि, संध्या व लकी ने पूरा सहयोग दिया।











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