आर. के. जोशी
नोहर। कुछ लोग चले जाते हैं, लेकिन उनकी यादें कभी नहीं जातीं। कुछ यादें ऐसी भी होती हैं, जो आंखों को नम करने के साथ किसी की जिंदगी बचाने की वजह बन जाती हैं। नोहर में स्वर्गीय अश्विनी चाचाण की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित रक्तदान शिविर ने श्रद्धांजलि की इसी मानवीय भावना को जीवंत कर दिया। चाचाण धर्मशाला में स्वर्गीय अश्विनी चाचाण की आठवीं पुण्यतिथि पर उनके परिजनों एवं भारत विकास परिषद, शाखा नोहर के संयुक्त तत्वावधान में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। शिविर में चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, उद्यमियों, पत्रकारों, समाजसेवियों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।
शिविर में 110 यूनिट रक्त संग्रह
रक्तदान शिविर में कुल 110 यूनिट रक्त संग्रह किया गया। रक्तदान करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह कुछ मिनटों की सेवा थी, लेकिन किसी जरूरतमंद मरीज और उसके परिवार के लिए यही रक्त जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। मोनोलिसा ब्लड बैंक, नोहर की टीम ने रक्त संग्रह किया।
ब्लड बैंक के डायरेक्टर एवं स्वयं 99वीं बार रक्तदान कर चुके अवतार सिंह मोनालिसा ने भी रक्तदान की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय अश्विनी चाचाण के परिजनों को मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।
रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र के साथ पौधे
शिविर की खास पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। भारत विकास परिषद नोहर के पदाधिकारियों एवं चाचाण परिवार की ओर से रक्तदाताओं को प्रमाण-पत्र के साथ एक-एक पौधा भी भेंट किया गया।
इस पहल के माध्यम से संदेश दिया गया कि आज किसी इंसान की जिंदगी को रक्त से सींचिए और धरती की जिंदगी को पौधे से।
कार्यक्रम में भारतमाता आश्रम के महंत रामनाथ अवधूत, पूर्व चेयरमैन राजेंद्र चाचाण, सुमित चाचाण, ईओ गिरिराज रतनु, तहसीलदार बजरंग लाल, डॉ. चंद्र कुमार खाती, ओमप्रकाश सुथार, प्रधानाचार्य महेंद्र मिश्रा, व्याख्याता महेंद्र प्रताप शर्मा, समाजसेवी अशोक कन्दोई, पुरुषोत्तम कन्दोई, डॉ. हरीश गुप्ता, डॉ. भीम गोयल, डॉ. मंजीत ढाका, डॉ. सुरेंद्र शर्मा, महेश भूकरकेवाला, पूनम बेरवाला, बसंत तिवाड़ी, सुभाष स्वामी, बजरंग स्वामी, जयदेव इन्दोरिया, डॉ. गौतम स्वामी, सन्नी चाचाण, शिक्षाविद् डॉ. जगदीश इन्दोरिया, प्रिंसिपल हरिसिंह पूनिया, शिक्षाविद् तेजकुमार शर्मा, शिक्षाविद् जगदीश शर्मा, एडवोकेट के.एल. मित्रुका, हरि मित्रुका, ग्लोबल ज्ञानदान स्कूल नोहर के डायरेक्टर चौधरी प्रतापसिंह सिंवर, किशन चाचाण, दुनीचंद मित्रुका सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
फूलों से नहीं, रक्तदान से दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में यह संदेश विशेष रूप से सामने आया कि किसी दिवंगत व्यक्ति की स्मृति को जीवित रखने का सबसे सार्थक तरीका समाजसेवा भी हो सकता है। फूलों से श्रद्धांजलि देने के बजाय रक्तदान कर किसी अनजान जरूरतमंद के जीवन का सहारा बनना स्वर्गीय अश्विनी चाचाण की पुण्यतिथि को सार्थक बना गया। रक्त की एक बूंद का महत्व वही परिवार बेहतर समझ सकता है, जिसके घर में जिंदगी और मौत के बीच महज एक बूंद रक्त का फासला हो। ऐसे में 110 यूनिट रक्त का संग्रह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 110 संभावित जीवनों के लिए उम्मीद का संदेश है।स्वर्गीय अश्विनी चाचाण की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित यह शिविर स्मृति को सेवा में बदलने की अनुकरणीय पहल बन गया। शरीर संसार से विदा हो जाता है, लेकिन उसके नाम पर किए गए सत्कर्म उसकी स्मृति को लंबे समय तक जीवित रखते हैं।












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