महाकाल के दरबार में हरि गिरि महाराज का विशेष अनुष्ठान

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हरिद्वार, नासिक और उज्जैन महाकुंभ की सफलता के लिए किया पंचामृत अभिषेक, निर्विघ्न और दिव्य आयोजन की कामना

अमित कुमार

हरिद्वार। आगामी हरिद्वार, नासिक और उज्जैन महाकुंभ के सफल, निर्विघ्न और भव्य आयोजन की कामना को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान महाकाल का विधिवत पंचामृत अभिषेक कर सनातन संस्कृति के सबसे बड़े पर्व महाकुंभ के शांतिपूर्ण और दिव्य आयोजन के लिए प्रार्थना की। श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शर्करा और शहद से भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु मौजूद रहे।

तीनों कुंभों की सफलता के लिए अनुष्ठान

गौरतलब है कि 2027 में हरिद्वार और नासिक तथा 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। आगामी कुंभ पर्वों को लेकर अखाड़ा परिषद ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में श्रीमहंत हरि गिरि महाराज देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और तीर्थस्थलों पर विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं। इससे पूर्व श्रावण मास में हरिद्वार में चातुर्मास प्रवास के दौरान भी उन्होंने कुंभ मेले की सफलता और निर्विघ्न आयोजन के लिए रुद्राभिषेक, हवन एवं विशेष पूजा-अर्चना की थी। हरिद्वार प्रवास के दौरान उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कुंभ मेला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर मेले की व्यवस्थाओं, अखाड़ों के लिए भूमि आवंटन, संतों की सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए थे।

 

नासिक और उज्जैन प्रशासन से जल्द होगी बैठक

महाकाल दर्शन एवं पूजन के बाद श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद का प्रयास है कि आगामी तीनों कुंभ पर्व सनातन परंपरा और अखाड़ों की मर्यादा के अनुरूप दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित हों। इसके लिए शासन-प्रशासन और अखाड़ों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में जल्द ही मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मेला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। बैठकों में कुंभ की व्यवस्थाओं, संतों एवं अखाड़ों की सुविधाओं, भूमि आवंटन, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का विराट पर्व है। इसे दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए अखाड़ा परिषद शासन-प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर प्रयास करेगी।

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