फिजियोथेरेपी दिवस पर छात्रों ने हृदय रोग व स्ट्रोक से बचाव के बताए वैज्ञानिक उपाय
‘सिट लेस, मूव मोर’ का दिया संदेश, बीई-फास्ट से स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने पर जोर
पी के गुप्ता
गया जी। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर मगध विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग में आज विशेष पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता आयोजित की गई। विभागीय सभागार में हुई प्रतियोगिता में स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राओं ने शोधपरक मॉडल, चार्ट और पोस्टरों के माध्यम से हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का विषय ‘हृदय रोग एवं स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका’ रखा गया था। छात्रों ने बदलती जीवनशैली और बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं के साथ उनके बचाव और पुनर्वास के वैज्ञानिक तरीकों को मॉडल के जरिए समझाया।
‘सिट लेस, मूव मोर’ का संदेश
छात्रों ने ‘सिट लेस, मूव मोर’ का संदेश देते हुए लोगों को लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। पोस्टरों में नियमित शारीरिक गतिविधि को हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण बताया गया। वहीं, बाईपास सर्जरी और एंजियोप्लास्टी के बाद मरीजों की रिकवरी में कार्डियक रिहैबिलिटेशन की भूमिका को मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
‘बीई-फास्ट’ से स्ट्रोक की जल्द पहचान
स्ट्रोक प्रबंधन पर प्रस्तुत मॉडल में इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए ‘बीई-फास्ट’ (BE-FAST) पद्धति को प्रमुखता से समझाया गया। छात्रों ने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में समय पर लक्षणों की पहचान और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। रिकवरी प्रक्रिया में इंस्पिरेटरी मसल ट्रेनिंग की उपयोगिता भी मॉडल के माध्यम से बताई गई। इसके अलावा छात्रों ने उच्च तीव्रता वाले अंतराल प्रशिक्षण (HIIT) और नियमित प्रशिक्षण के प्रभावों की तुलना करते हुए अस्पताल एवं घर पर दी जाने वाली फिजियोथेरेपी के विभिन्न पहलुओं को भी प्रस्तुत किया।
क्लिनिकल निष्कर्षों पर छात्रों से सवाल
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. एसएनपी यादव ‘दीन’, प्रो. जावेद अशरफ, निदेशक पूनम सिंह और डॉ. आनंद प्रियदर्शी शामिल रहे। निर्णायकों ने सभी पोस्टर एवं मॉडलों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रों से उनके क्लिनिकल निष्कर्षों और केस स्टडी से संबंधित सवाल पूछकर विषय की समझ का आकलन किया। निर्णायकों ने छात्रों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रभावी प्रस्तुति की सराहना की। कार्यक्रम का आयोजन विभागीय प्राध्यापकों डॉ. पांडेय, रोहित कुमार सिन्हा, डॉ. नंदिनी और डॉ. नीरज के मार्गदर्शन में किया गया। चार्ट एवं मॉडल तैयार करने में भी शिक्षकों ने छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम के सफल संचालन और तकनीकी व्यवस्था में निशांत और हितेश का विशेष योगदान रहा।












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