आधुनिक पाणिनि ने हिंदी को दिया वैज्ञानिक आधार : धर्मेंद्र चौधरी

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पुण्यतिथि पर प्रेस क्लब ने किया आचार्य किशोरी दास वाजपेयी को नमन 

ए. गुप्ता

हरिद्वार। साहित्यकार एवं हिंदी व्याकरण के महान विद्वान आचार्य किशोरी दास वाजपेयी की पुण्यतिथि पर प्रेस क्लब हरिद्वार के पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। कनखल चौक और प्रेस क्लब परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर पत्रकारों ने उनके साहित्यिक एवं भाषायी योगदान को याद किया। इसके बाद प्रेस क्लब सभागार में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि आचार्य किशोरी दास वाजपेयी हिंदी भाषा और व्याकरण के महान विद्वानों में शुमार हैं। उन्हें हिंदी का ‘पाणिनि’ और ‘आधुनिक पाणिनि’ भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि आचार्य वाजपेयी ने हिंदी को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया और यह स्थापित किया कि हिंदी केवल संस्कृत की अनुगामी भाषा नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान और व्याकरणिक स्वरूप वाली समृद्ध भाषा है। पत्रकारिता में शुद्ध एवं प्रभावी हिंदी के प्रयोग के लिए उनके विचार आज भी प्रेरणादायी हैं। प्रेस क्लब महासचिव सूर्यकांत बेलवाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा देने में आचार्य वाजपेयी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने सरल, सुबोध और शुद्ध हिंदी के प्रयोग पर जोर दिया। आज भाषा में अंग्रेजी और संस्कृत के अनावश्यक मिश्रण की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे समय में आचार्य वाजपेयी के विचारों को अपनाने की आवश्यकता है। वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी एवं सुनील दत्त पांडे ने कहा कि आचार्य वाजपेयी ने हिंदी व्याकरण को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनभाषा से जोड़ा। उनका मानना था कि पत्रकारिता की भाषा ऐसी होनी चाहिए, जिसे आम जनता सहजता से समझ सके। उनकी पुण्यतिथि हमें हिंदी के सम्मान और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र कन्नौजिया एवं दीपक नौटियाल ने कहा कि जिस प्रकार महर्षि पाणिनि ने संस्कृत को वैज्ञानिक व्याकरण प्रदान किया, उसी प्रकार आचार्य किशोरी दास वाजपेयी ने आधुनिक हिंदी की प्रकृति और उसके व्याकरणिक स्वरूप को व्यवस्थित एवं समझने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका स्पष्ट मत था कि हिंदी एक स्वतंत्र भाषा है। वह संस्कृत से प्रभावित जरूर है, लेकिन उसके अपने व्याकरणिक नियम और भाषिक स्वभाव हैं। इसलिए संस्कृत के नियमों को बिना विचार किए हिंदी पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। गोष्ठी में काशीराम सैनी, श्रवण झा, आदेश त्यागी, बालकृष्ण शास्त्री, जोगेंद्र सिंह मावी, राजकुमार, नवीन चौहान, डॉ. शिवा अग्रवाल, अमित गुप्ता, महेश पारीक, बृजपाल सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश जोशी, बृजेन्द्र हर्ष, ललितेंद्र नाथ, रामेश्वर दयाल शर्मा, रूपेश वालिया, कुलभूषण शर्मा, लव शर्मा, मेहताब आलम सहित प्रेस क्लब से जुड़े अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।

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