स्वामी रामदेव बोले— योग और आयुर्वेद को मिलेगा विश्व चिकित्सा पद्धति का दर्जा, पतंजलि ने शोध के क्षेत्र में रचा नया इतिहास
अमित कुमार
हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण का जन्मदिवस मंगलवार को पतंजलि योगपीठ-2 स्थित योग भवन सभागार में ‘जड़ी-बूटी दिवस’ के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर रक्तदान शिविर, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच, औषधि वितरण, औषधीय पौधों के वितरण और आयुर्वेदिक अनुसंधान से जुड़ी नई उपलब्धियों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भाग लिया। स्वामी रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग, आयुर्वेद, स्वदेशी और सनातन जीवन पद्धति पूरी दुनिया के लिए वैज्ञानिक एवं सर्वहितकारी मॉडल बन रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में योग और आयुर्वेद को विश्व चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ने आयुर्वेद को वैज्ञानिक शोध और साक्ष्यों के आधार पर नई पहचान दिलाई है। उनके अनुसार लिवर, किडनी, मधुमेह, थायरॉयड, हृदय रोग और अन्य जटिल बीमारियों पर अनुसंधान आधारित आयुर्वेदिक औषधियां विकसित की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि आयुर्वेद में जो कार्य वर्षों तक नहीं हो सका, उसे पतंजलि ने शोध के माध्यम से संभव किया है। स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा बोर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में लाखों विद्यालय इससे जुड़ेंगे।
जन्मदिन संकल्प लेने का दिन : आचार्य बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जन्मदिन केवल उत्सव नहीं बल्कि समाज और मानवता के लिए नए संकल्प लेने का अवसर होता है। उन्होंने रोगमुक्त समाज, वृक्षारोपण, रक्तदान और श्रेष्ठ कार्यों के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन दशकों से उनका जन्मदिवस जड़ी-बूटी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और इस दौरान करोड़ों पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे की पूरक हैं तथा पर्यावरण संरक्षण के बिना सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता।
12 नई आयुर्वेदिक औषधियों का लोकार्पण
कार्यक्रम में पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित 12 साक्ष्य आधारित आयुर्वेदिक औषधियों का लोकार्पण किया गया। इनमें हीमोग्रिट वाइटल सिरप, रीनोग्रिट सिरप, लिवोग्रिट सिरप, स्वर्ण ओज प्राशन ड्रॉप, लिपिडोम एडवांस टैबलेट, आईग्रिट एडवांस आई ड्रॉप सहित अन्य औषधियां शामिल हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि इन औषधियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान और परीक्षण किए जा चुके हैं।
40 नई पुस्तकों का विमोचन
जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित 40 पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।
इनमें ‘वर्ल्ड बॉटनिकल डिक्शनरी’, ‘एन्साइक्लोपीडिया ऑफ हर्बल रेमेडीज’, ‘एन्साइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन हर्ब्स’ तथा आयुर्वेद पर आधारित कई शोध ग्रंथ शामिल हैं। साथ ही 140 वैज्ञानिक शोधपत्रों पर आधारित विशेष पुस्तक “Ancient Wisdom Through the Lens of Science: Evidence, Excellence, Eminence” भी जारी की गई।
710 यूनिट रक्तदान, 1500 मरीजों की स्वास्थ्य जांच
कार्यक्रम में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने स्वयं रक्तदान कर लोगों को प्रेरित किया। शिविर में लगभग 710 यूनिट रक्तदान हुआ। वहीं, पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल की ओर से आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर में करीब 1500 मरीजों की रक्त जांच, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, नेत्र, हृदय, अस्थि, दंत एवं फिजियोथेरेपी संबंधी जांच की गई तथा नि:शुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
औषधीय पौधों का वितरण
जड़ी-बूटी दिवस के अवसर पर लोगों को नीम, तुलसी, एलोवेरा, लौंग तुलसी और आंवला सहित विभिन्न औषधीय पौधे नि:शुल्क वितरित किए गए।
स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने सभी से कम से कम एक पौधा लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों, शिक्षण संस्थानों, संन्यासियों, अधिकारियों, कर्मयोगियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।












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