व्यवस्थाओं से संतुष्ट दिखे शिवभक्त, सुरक्षा, सफाई और सुविधाओं की सराहना
अमित कुमार
हरिद्वार। विश्व की सबसे बड़ी निरंतर चलने वाली कांवड़ यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यात्रा के समापन की ओर बढ़ते ही धर्मनगरी हरिद्वार में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार पहुंच रहे हैं। इस बीच यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं ने संतोष व्यक्त किया है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा कांवड़ यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा शिविर, विश्राम स्थलों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मोदीनगर से आए शिवभक्त तरुण कुमार ने बताया कि इस बार कांवड़ियों के लिए शौचालय, पेयजल और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कांवड़ियों के चरण धोकर सम्मान करने और पुष्पवर्षा किए जाने से श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ा है। छठी बार कांवड़ यात्रा पर आए गोपाल कश्यप ने कहा कि इस वर्ष मेडिकल कैंप, भोजन और ठहरने की व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक बेहतर रही। उन्होंने इन व्यवस्थाओं के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। श्रद्धालु अखिल पंडित ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा कांवड़ यात्रियों पर कई बार पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को विशेष सम्मान का अनुभव हुआ। उन्होंने यात्रा के दौरान उपलब्ध कराई गई सुविधाओं की भी सराहना की। अन्य शिवभक्तों ने भी कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा कांवड़ियों की सुविधा के लिए किए गए प्रबंध संतोषजनक हैं और यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।दिल्ली, उत्तर प्रदेश, नोएडा और हरियाणा से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन का सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया, जिससे यात्रा का अनुभव और अधिक यादगार बन गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस वर्ष यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा पुलिस-प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर व्यवस्थाओं के कारण उनकी कांवड़ यात्रा सुगम, सुरक्षित और सुखद रही।












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