कांवड़ बाजार अतिक्रमण की चपेट में, टेंडर लंबित; तैयारियां अधर में लटकी

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मुख्यमंत्री और डीएम सक्रिय, नगर निगम की सुस्ती से कांवड़ मेले की तैयारियों पर संकट के बादल

डॉ. हिमांशु द्विवेदी

हरिद्वार। आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाले कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन नगर निगम की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री स्तर पर हरिद्वार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की जा चुकी है और जिलाधिकारी भी लगातार निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने तथा व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं। इसके बावजूद नगर निगम की धीमी कार्यशैली मेले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल चमगादड़ टापू स्थित कांवड़ बाजार को लेकर सामने आया है। कांवड़ मेले के शुभारंभ में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन अभी तक मेला स्थल का टेंडर जारी नहीं हो सका है। टेंडर प्रक्रिया लंबित होने के कारण दूर-दराज से आने वाले दुकानदार असमंजस में हैं। हर वर्ष बड़ी संख्या में व्यापारी यहां अस्थायी दुकानें लगाकर अपना रोजगार चलाते हैं, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि चमगादड़ टापू क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में बताया जा रहा है। ऐसे में यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी भी कर ली जाती है, तो दुकानदारों के लिए स्थान उपलब्ध कराने की चुनौती सामने होगी। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो कांवड़ बाजार की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम को टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी तत्काल शुरू करनी चाहिए। कांवड़ मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की देरी आगे चलकर बड़ी अव्यवस्था का कारण बन सकती है। अब सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी स्तर पर कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर लगातार समीक्षा और निरीक्षण किया जा रहा है, तो नगर निगम की कार्यशैली में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही? मेले की शुरुआत के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम समय रहते टेंडर और अतिक्रमण की समस्या का समाधान कर पाता है या नहीं। वही दूसरी तरफ एक पार्षद ने गंभीर होते हुए कहा कि नगर निगम के आलाधिकारियों के हाथ शायद कोई दिव्य चिराग़ लग गया है जिससे रातोंरात सारी व्यवस्थाओं को शासन प्रशासन द्वारा जारी 25 जुलाई की डेड लाइन खत्म होने से पहले ही अमलीजामा पहना दिया जायेगा!

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