लेखक गाँव से विश्वभर में गूंजा राष्ट्रप्रेम का स्वर, ‘ऐ वतन तेरे लिए’ में 60 से अधिक देशों की सहभागिता

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अमित कुमार

देहरादून। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लेखक गाँव, सृजनी ग्लोबल (अमेरिका, कनाडा, जर्मनी) एवं इंडो-जर्मन लिटरेरी फोरम (वैश्विक हिन्दीशाला संस्थान, यूरोप) के संयुक्त तत्वावधान में ‘ऐ वतन तेरे लिए : एक शाम–देश के नाम’ अंतरराष्ट्रीय काव्य संगोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 60 से अधिक देशों के बच्चों, युवाओं और प्रवासी रचनाकारों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने की। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक के संरक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और साहित्यिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि ‘ऐ वतन तेरे लिए’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के प्रति अकलुषित मन से निस्वार्थ सेवा करने का संकल्प है। उन्होंने भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को स्मरण करते हुए बताया कि उन्होंने ही इस काव्य संग्रह का विमोचन किया था। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को राष्ट्रभक्ति से जोड़ने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने कहा कि डॉ.निशंक का साहित्य वर्तमान और भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहा है। बच्चों द्वारा उनकी रचनाओं का पाठ यह प्रमाणित करता है कि नई पीढ़ी साहित्य और राष्ट्र भावना से जुड़ रही है। लेखक गाँव ऐसी प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा। डॉ.शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने कहा कि बच्चों और युवाओं द्वारा ‘ऐ वतन तेरे लिए’ की रचनाओं का पाठ उनके मन में देश के प्रति कर्तव्यबोध का बीज रोपेगा। साहित्य में समाज और सोच को बदलने की शक्ति है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वयं से होनी चाहिए और निरंतर स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम के प्रारंभ में लेखक गाँव के जनसंपर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.बेचैन कण्डियाल ने डॉ.निशंक के साहित्य और उसमें निहित राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनकी रचनाओं का प्रभावी पाठ करते हुए कहा कि निशंक के साहित्य में राष्ट्रीय चेतना के स्वर मुखर हैं, जो पाठकों को देश और समाज के प्रति अपने दायित्वों पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

बच्चों ने प्रस्तुत की देशभक्ति की रचनाएं

कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र में बच्चों एवं युवाओं ने डॉ. निशंक के काव्य संग्रह ‘ऐ वतन तेरे लिए’ की कविताओं का पाठ किया। श्रेष्ठ कविता वाचन प्रतियोगिता में नव्या भट्ट ने प्रथम, शकीरा सैफी ने द्वितीय तथा वृंदा वाणी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। श्रेष्ठ वेशभूषा प्रतियोगिता में मनस्वी वर्मा प्रथम, सलोनी द्वितीय और शकीरा सैफी तृतीय रहीं। चेतन्या, मनस्वी वर्मा, सलोनी नेगी, समृद्धि गुप्ता, वैष्णवी सकलानी, अनन्या पाल, अर्पित अनितवाल एवं अनुश्री मिश्रा ने भी प्रभावी काव्य पाठ किया। सनराइज एकेडमी की कक्षा-1 की छात्रा सावी शर्मा और कक्षा-2 के छात्र हार्दिक खत्री की मनमोहक प्रस्तुतियों ने सभी का मन जीत लिया। प्रथम सत्र का संचालन सनराइज एकेडमी की हिंदी विभागाध्यक्ष मोनिका शर्मा ने किया।

विदेशों से जुड़े रचनाकारों ने बांधा समां

द्वितीय सत्र में देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित रचनाकारों ने डॉ.निशंक की रचनाओं के साथ अपनी स्वरचित देशभक्ति कविताओं का पाठ किया। बेल्जियम से कपिल कुमार, नीदरलैंड से विश्वास दुबे एवं मनीष पांडेय ‘मनु’, अमेरिका से शुभ्रा ओझा, सिंगापुर से आराधना झा श्रीवास्तव, चीन से विवेक मणि त्रिपाठी, कनाडा से प्राची चतुर्वेदी रंधावा, कतर से डॉ.मीनू मानसी, कुवैत से संगीता चौबे पंखुड़ी, यूके से आशुतोष कुमार, जर्मनी से पंखुड़ी भटनागर एवं रश्मि त्रिवेदी तथा श्रीलंका से अतिला कोठलावाला ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। भारत से डॉ. किरण खन्ना, डॉ.राधा बिष्ट, इंदिरा शर्मा, प्रबुद्ध एवं डॉ.भारती मिश्रा सहित अन्य रचनाकारों ने भी देशभक्ति और संवेदनशील रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम की संकल्पना में पूजा पोखरियाल एवं आशना कंडियाल नेगी का विशेष योगदान रहा। अंत में डॉ.बेचैन कण्डियाल ने सभी प्रतिभागियों, रचनाकारों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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