फॉर्म-7 के दुरुपयोग से वैध मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप

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हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत बोलीं—मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर उठाएंगी आवाज

अमित कुमार

हरिद्वार। हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। विधायक ने कहा कि जिन मतदाताओं को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ओर से नाम से संबंधित विसंगतियां दूर करने के लिए नोटिस दिए गए हैं, उनके नाम फॉर्म-7 के माध्यम से हटाने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि कुछ मामलों में जीवित मतदाताओं को मृत दर्शाकर भी फॉर्म-7 लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।

बीएलओ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए अनुपमा रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के खिलाफ भी फॉर्म-7 लगाए गए हैं, जो अपने गांव में ही निवास कर रहे हैं और पूर्व में कई बार मतदान कर चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 6 अगस्त 2026 को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में एक मतदाता का नाम फॉर्म-7 के माध्यम से हटाने का प्रयास किया गया, जबकि संबंधित मतदाता अपने गांव में ही रह रहा है। ऐसे में उसके नाम को हटाने के लिए फॉर्म-7 किस आधार पर लगाया गया, यह जांच का विषय है।

तीन दिनों में 883 नाम हटाने के प्रयास का दावा

विधायक ने दावा किया कि 7 अगस्त को 126, 8 अगस्त को 426 और 9 अगस्त को 331 मतदाताओं के नाम फॉर्म-7 के माध्यम से हटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि बीएलओ से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित मतदाता अपने-अपने गांवों में रह रहे हैं और उन्होंने देश के किसी अन्य हिस्से में अपना नाम किसी दूसरे मतदान केंद्र पर पंजीकृत नहीं कराया है। उन्होंने फॉर्म-7 के बार-बार इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। अनुपमा रावत के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा अधिकतम पांच बार फॉर्म-7 का प्रयोग किए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे मामले भी मिले हैं, जहां एक व्यक्ति ने पांच से अधिक बार फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त को जोगेंद्र सिंह ने 11 और गुरुदयाल सिंह ने सात फॉर्म-7 लगाए।

फॉर्म-10 सार्वजनिक करने की मांग

विधायक ने फॉर्म-10 को सार्वजनिक किए जाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि फॉर्म-10 के अवलोकन से यह स्पष्ट हो सकता है कि किन मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है और उसके पीछे क्या कारण दर्ज किए गए हैं। उनका आरोप है कि अभी तक कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर फॉर्म-10 सार्वजनिक नहीं किया गया है। अनुपमा रावत ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने प्रशासन से फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की शिकायतों की जांच कराने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के दुरुपयोग के संबंध में प्रशासन को भी अपने स्तर से शिकायत दर्ज करनी चाहिए। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए वह हर स्तर पर आवाज उठाएंगी। यदि वैध मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में मुशर्रफ अंसारी, कादिर, नदीम, हमीद, शमा, नोमान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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