ज्वालापुर के जटवाड़ा पुल पर भंडारे में परोसा भोजन, कांवड़ उठाकर दिया सेवा और समर्पण का संदेश
अमित कुमार
हरिद्वार। श्रावण मास में आयोजित कांवड़ मेले के भक्तिमय वातावरण के बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने ज्वालापुर स्थित जटवाड़ा पुल पर कांवड़ सेवा दल द्वारा आयोजित सेवा शिविर में पहुंचकर शिवभक्तों की सेवा की। उन्होंने अपने हाथों से कांवड़ियों को भोजन परोसा और स्वयं कांवड़ उठाकर श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया।आज आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में सुबह से ही हजारों कांवड़िए भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे थे। डॉ. निशंक के आगमन पर शिवभक्तों और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
डॉ. निशंक ने बिना किसी औपचारिकता के भोजन वितरण में हिस्सा लिया और कतार में बैठे कांवड़ियों को अपने हाथों से पूड़ी, सब्जी और प्रसाद परोसा। उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद कर उनकी यात्रा, स्वास्थ्य और मार्ग में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली। इस दौरान कांवड़ियों ने सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और विश्राम स्थलों सहित शासन-प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया और व्यवस्थाओं की सराहना की। भोजन वितरण के बाद डॉ. निशंक ने गंगाजल से भरी कांवड़ अपने कंधे पर उठाई। उन्हें कांवड़ के साथ देखकर श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना हो गया और पूरा परिसर शिवभक्ति के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर डॉ. निशंक ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान सेवा और श्रद्धा से है तथा यहां आने वाला प्रत्येक शिवभक्त प्रदेश का सम्मानित अतिथि है। उन्होंने कहा, “प्रशासन द्वारा कांवड़ यात्रा के लिए की गई व्यवस्थाएं सराहनीय हैं। हम सभी का दायित्व है कि प्रत्येक कांवड़िया सुरक्षित, सम्मानजनक और सुखद वातावरण में अपनी यात्रा पूरी कर सके।” कांवड़ सेवा दल के पदाधिकारियों संदीप शर्मा, नितिन चौहान और सोम चौहान ने डॉ. निशंक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सेवा कार्य से श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ा है और समाज में सेवा की भावना को नई प्रेरणा मिली है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, स्वयंसेवक और शिवभक्त उपस्थित रहे। जटवाड़ा पुल पर सेवा, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने कांवड़ मेले की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक प्रखर बना दिया।












Leave a Reply