कमाल है जनता जनार्दन का फैसला!

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आर. के. जोशी

नोहर में 20-20 का जनादेश—जनता ने बता दिया, असली ताकत उसके हाथ में है नोहर नगरपालिका चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनता से बड़ा कोई नहीं होता। 40 सीटों वाली नोहर नगरपालिका में जनता ने भारतीय जनता पार्टी को 20 और कांग्रेस को भी 20 सीटें देकर ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे केवल चुनाव परिणाम मानना भूल होगी। यह दरअसल जनता का स्पष्ट संदेश और राजनीतिक दलों के लिए आत्ममंथन का अवसर है। जनता जनार्दन ने किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत देने के बजाय दोनों प्रमुख दलों को बराबरी पर ला खड़ा किया। यानी जनता ने साफ कह दिया कि सत्ता का अहंकार मत पालिए, क्योंकि मतदाता सब देख रहा है और समय आने पर अपना फैसला भी सुनाता है। अब वह जमाना नहीं रहा जब चुनाव जीतने के बाद पांच साल तक जनता की सुध लेने की जरूरत महसूस नहीं की जाती थी। आज का मतदाता जागरूक है, सवाल पूछता है, काम का हिसाब मांगता है और अपने वोट की कीमत भी अच्छी तरह पहचानता है। चुनाव के समय जनता के दरवाजे पर जाकर हाथ जोड़ना और चुनाव जीतने के बाद जनता से दूरी बना लेना—यह राजनीति अब नहीं चल सकती। जनता को केवल वोट बैंक समझने की भूल किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि को भारी पड़ सकती है। चुनाव जीतने के बाद असली जिम्मेदारी की शुरुआत होती है। जनप्रतिनिधि को यह समझना होगा कि उसे कुर्सी जनता ने दी है। इसलिए उस कुर्सी की पहली और आखिरी जिम्मेदारी जनहित होनी चाहिए। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा, यातायात, रोजगार और शहर के विकास जैसे मुद्दे किसी पार्टी के नहीं, बल्कि आम जनता के मुद्दे हैं। जनता चाहती है कि उसके प्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर काम करें और दलगत मतभेदों से परे शहर के विकास को प्राथमिकता दें।नोहर की जनता ने 20-20 का जनादेश देकर शायद यही संदेश दिया है कि—

हमने आपको चुना है, लेकिन हम किसी के बंधे हुए मतदाता नहीं हैं।

आज जनता को यह मालूम है कि लोकतंत्र में उसका एक-एक वोट कितना महत्वपूर्ण है। यही जागरूकता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए किसी भी जनप्रतिनिधि को कभी यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वह जनता से बड़ा हो गया है। जनप्रतिनिधि जनता का सेवक है, मालिक नहीं। जो व्यक्ति जनता के बीच रहकर जनता के सुख-दुख को समझेगा, जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देगा और अपने कार्यकाल में ईमानदारी से काम करेगा, जनता निश्चित रूप से उसे सम्मान देगी।लेकिन यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता से दूरी बनाता है, समस्याओं की अनदेखी करता है और स्वयं को जनता से बड़ा समझने की भूल करता है, तो याद रखना चाहिए—

जनता का फैसला देर से आ सकता है, लेकिन जब आता है तो बहुत कुछ बदल देता है।

राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा संदेश

नोहर का यह चुनाव परिणाम सभी राजनीतिक दलों के लिए एक अवसर है कि वे आत्ममंथन करें। जनता को जाति, वर्ग, व्यक्तिगत समीकरणों या केवल चुनावी नारों तक सीमित न समझें। जनता अब विकास चाहती है, सम्मान चाहती है और अपने प्रतिनिधियों से जवाबदेही चाहती है। इसलिए अब जरूरत है कि सभी राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर जनसेवा की राजनीति को मजबूत करें। जनता को सर्वोपरि मानिए, जनहित को प्राथमिकता दीजिए और जनता के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी समझिए। क्योंकि लोकतंत्र में कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन जनता की याददाश्त बहुत लंबी होती है।

और अंत में बस इतना—आपकी ताकत कुर्सी नहीं—जनता का विश्वास है।”

नोहर के मतदाताओं को इस जागरूक और संतुलित जनादेश के लिए सलाम। अब निगाहें उन 40 जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे इस जनादेश को राजनीतिक खींचतान में बदलते हैं या नोहर के विकास और जनहित की नई इबारत लिखते हैं।

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