अमित कुमार
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के चर्चित उपन्यास ‘कृतघ्न’ के डोगरी अनुवाद ‘किर्तघान’ का भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया। उपन्यास का डोगरी भाषा में अनुवाद जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध लेखिका, शिक्षाविद् एवं अनुवादक डॉ. लवली शर्मा ने किया है। पुस्तक का लोकार्पण डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हुआ। डॉ. लवली शर्मा जम्मू-कश्मीर की वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं अनुवादक हैं। एससीईआरटी जम्मू से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा को शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2017 में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे कहानी, कविता और शैक्षिक लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के उपन्यास ‘कृतघ्न’ का अपनी मातृभाषा डोगरी में अनुवाद करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि शब्दों के साथ सृजनात्मक रूप से जुड़ना उन्हें हमेशा पसंद रहा है, लेकिन किसी उपन्यास का अनुवाद कर उसे पाठकों के सामने प्रस्तुत करना उनके लिए एक सपना था। उन्होंने बताया कि ‘किर्तघान’ आज के समाज में टूटते-बिखरते रिश्तों, संवेदनाओं की कमी और बढ़ती स्वार्थपरता की कहानी है। उपन्यास समाज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को सामने रखते हुए रिश्तों के बिखराव और उनके पुनः जुड़ने की यात्रा को प्रस्तुत करता है। इसमें मानवीय संवेदनाओं, स्वार्थपरता और रिश्तों की जटिलताओं के बीच संघर्ष को प्रभावी ढंग से उजागर किया गया है। उपन्यास पाठकों को समाज में तेजी से कमजोर पड़ रहे नैतिक मूल्यों और संस्कारों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करता है। डोगरी अनुवाद के माध्यम से यह कृति जम्मू-कश्मीर सहित डोगरी भाषी पाठकों तक पहुंच सकेगी और डॉ. निशंक के साहित्य को व्यापक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। लोकार्पण समारोह में साहित्य, समाज, प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति, मीडिया, उद्योग, विज्ञान, रक्षा, न्याय, अध्यात्म और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।












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