लेखराज जोगी की मुहिम को संतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का समर्थन, 108 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ प्रतिमा की मांग पर सरकार से निर्णायक पहल की उम्मीद
ए. गुप्ता
इंदौर। गुरु गोरखनाथ की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की स्थापना सहित नाथ समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शासन स्तर पर मान्यता दिलाने की मांग अब व्यापक जनसमर्थन के साथ राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। लेखराज जोगी ने उज्जैन के महाकाल लोक में शिव अवतारी भगवान गुरु गोरखनाथ जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर लंबे समय से अभियान चला रखा है।
उनका कहना है कि नाथ संप्रदाय भारतीय सनातन परंपरा, योग, साधना और राष्ट्र चेतना की अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में नाथ समाज के आराध्य गुरु गोरखनाथ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय है।
मांग अब आंदोलन से बढ़कर राजनीतिक मुद्दा बनी
शुरुआत में जिन मांगों को कुछ लोगों ने असंभव बताया था, आज उन्हीं मांगों को लेकर संत समाज, महंतों, पीठाधीश्वरों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यदि यह समर्थन इसी तरह मजबूत होता रहा तो आने वाले समय में यह मुद्दा शासन और राजनीतिक नेतृत्व के सामने एक महत्वपूर्ण सामाजिक मांग के रूप में और मजबूती से उठ सकता है।लेखराज जोगी का कहना है कि यह किसी व्यक्ति की निजी मांग नहीं है, बल्कि नाथ समाज के करोड़ों अनुयायियों की आस्था, सम्मान और गौरव से जुड़ा विषय है।
उनका संघर्ष नाथ समाज की आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत से जोड़ने का अभियान है।
संत समाज और जनप्रतिनिधियों के समर्थन से बढ़ी मुहिम की ताकत
लेखराज जोगी की मुहिम को संत समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ ही जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल रहा है। यही कारण है कि अब यह अभियान केवल ज्ञापन और मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नाथ समाज के स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान की बड़ी आवाज बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाथ समाज की व्यापक सामाजिक और आध्यात्मिक पहुंच को देखते हुए इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है।
यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक पहल करती है तो इससे नाथ समाज में व्यापक संदेश जाएगा और प्रदेश सहित देशभर में नाथ परंपरा के सम्मान को नई पहचान मिल सकती है।
‘संकल्प पूरा होने तक संघर्ष जारी रहेगा’
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों से प्रेरित लेखराज जोगी का कहना है कि समाज और राष्ट्रहित के लिए किए गए कार्य में व्यक्तिगत स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि जब लक्ष्य समाज के सम्मान और सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा से जुड़ा हो तो संघर्ष कितना भी लंबा क्यों न हो, पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि नाथ समाज के सम्मान और गुरु गोरखनाथ की भव्य प्रतिमा की स्थापना का संकल्प अब केवल उनका व्यक्तिगत संकल्प नहीं रहा, बल्कि यह समाज की सामूहिक आवाज बन चुका है। संतों, समाज और जनप्रतिनिधियों का बढ़ता समर्थन इस बात का संकेत है कि यह ऐतिहासिक अभियान अब अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंच चुका है। लेखराज जोगी ने स्पष्ट किया कि जब तक नाथ समाज के सम्मान और गौरव से जुड़ी मांगों पर निर्णायक पहल नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।
“यह किसी व्यक्ति की मांग नहीं, नाथ समाज के स्वाभिमान की आवाज है।”












Leave a Reply