भारीजा में आदिशक्ति पहाड़ों वाली दुर्गा माता मंदिर में अष्टमी को भक्तों ने जयकारों के साथ माता के किए दीदार

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सुरेश कुमावत

दांतारामगढ़।  ग्राम भारीजा में आदिशक्ति मां दुर्गा के दरबार में चैत्र नवरात्रा महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। आदिशक्ति मां दुर्गा के दरबार में अष्टमी के दिन काफी संख्या में भक्तजनों, महिलाएं ग्रामीण जन माता के दरबार में पहुंच कर धोख लगाकर भक्तों ने विशेष आराधना करते हुए मां के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की तथा माता का आशीर्वाद लिया। भारीजा गाँव मे पहाड़ी पर स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्रा के दुर्गाष्टमी पर माता के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी । भक्तों ने जयकारों के साथ माता के दीदार किए। जानकारी के अनुसार यहां सप्तमी ओर अष्टमी के दिन काफी संख्या में महिलाएं ग्रामीण जन माता के दरबार में पहुंच कर धोख लगाकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। भारीजा दुर्गा माता के मन्दिर पुजारी प्रेमसुखजी स्वामी, पुरणजी स्वामी ने बताया कि अष्टमी को माता को जयपुर के विशेष प्रकार के फूलों से सजाया जाता है।

अष्टमी के दिन विशेष पूजा अर्चना, हवन, यज्ञ किया जाता है, तथा ओरण परिक्रमा की जाती है। माता के दरबार में नवरात्रा में भंडारा प्रसादी का आयोजन लगातार चलता रहता है, जिसमें हर दिन कन्याओं को भोजन करवाया जाता है वहीं अष्टमी को विशाल भंडारा रामलाल टेलर की लड़की आयुषी पत्नी पियुष टोलम्बिया के ससुरजी विजय, सरिता टोलम्बिया जयपुर की तरफ से किया गया। वहीं स्थानीय भक्त शिवसिंह भारीजा पलाड़ा ग्रूप ने अपने पिताजी स्व मदनसिंहजी की याद में 150 लीटर का वाटर कुलर भारीजा माता को भेंट किया। जानकारी के अनुसार नवरात्रि महोत्सव में प्रतिदिन संगीत, रामायण पाठ, श्री दुर्गा सप्तशीति पाठ, नव चंडी पाठ और संगीतमय रामायण पाठ का आयोजन होता है, साथ ही, कन्या भोजन और भंडारा रोजाना लगाया जा रहा है।

सप्तमी को प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा नवरात्रि भजन संध्या में संजय सौनी अड़कसर एंड पार्टी का भक्तिमय गायन भजन संध्या का आयोजन किया गया, माता के सुंदर-सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी जिससे माता के भजनों पर भक्तगण झूम उठे। उन्होंने बताया बताया कि अष्टमी के दिन महा आरती में काफी संख्या मे महिलाओं , भक्तजनों ने भाग लिया। माता के दरबार में महाराष्ट्र गुजरात दिल्ली आस-पास के गांव जयपुर कुचामन माउंट आबू से काफी संख्या में भक्त माता के दरबार में पहुंचते हैं।

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