आर. के. जोशी
नोहर। हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के गांव ललानिया, सागठिया और चेनपूरा में भारी ओलावृष्टि से किसानों की चने की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अचानक बदले मौसम और तेज आंधी-बारिश के साथ गिरे ओलों ने खेतों में खड़ी फसल को इस कदर नुकसान पहुंचाया कि अब खेतों में केवल तिनके ही बचे नजर आ रहे हैं।स्थानीय किसानों के अनुसार, चने की फसल इस बार अच्छी स्थिति में थी और उत्पादन को लेकर किसानों को काफी उम्मीदें थीं। लेकिन ओलावृष्टि ने कुछ ही मिनटों में सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में फैली फसल जमीन पर गिर गई और दाने झड़कर नष्ट हो गए। किसानों ने बताया कि कई जगहों पर तो पूरी फसल 80 से 100 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है। इस नुकसान से किसानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अधिकांश किसानों ने फसल में बीज, खाद और सिंचाई पर काफी खर्च किया था।
घटना के बाद प्रभावित किसानों ने प्रशासन से सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उनकी आजीविका पर गंभीर असर पड़ेगा।वहीं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से स्थिति का जायजा लेने और किसानों को जल्द से जल्द राहत देने की मांग की है। किसानों को अब सरकार से उम्मीद है कि उन्हें फसल बीमा योजना या आपदा राहत के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार ओलावृष्टि के बाद अभी तक प्रशासनिक स्तर पर सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है। किसानों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि उन्हें कब तक राहत मिलती है। निष्कर्ष इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर किसानों की निर्भरता मौसम पर होने की सच्चाई को उजागर कर दिया है। समय रहते उचित सहायता नहीं मिलने पर किसानों की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।











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