समान नागरिक संहिता लागू होने से मुस्लिम महिलाओं को हलाला व तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मिलेगी मुक्ति

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*हलाला के विरुद्ध प्रदेश में पहला मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता से दोबारा मिलने पहुंचीं अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम*

*अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष  ने कहा कि सोमवार से पीड़ित महिला को मिलेगी सुरक्षा*

अमित कुमार

हरिद्वार। प्रदेश में हलाला जैसी कुप्रथा के विरुद्ध साहसिक कदम उठाते हुए पहला मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से आज दूसरी बार उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती फरजाना बेगम उनके गांव बांद्रजूर्द बुग्गावाला पर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता एवं उनके परिवार से मिल कर कहा कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर उन्होंने पीड़ित महिला की सुरक्षा की मांग की गई थी, जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा सहमति दी गई।

उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को दूसरे पक्ष से धमकी मिल रही रही ,जिससे उनकी जान को खतरे को देखते हुए पीड़िता महिला को सोमवार से सुरक्षा प्रदान की कर दी जाएगी।
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा की सरकार की तरफ से पीड़िता कि हर संभव मदद की जाएगी तथा सरकार पीड़िता एवं उनके परिवार के साथ खड़ी है। इस अवसर पर भाजपा अल्पसंख्यक महिला मोर्च की अध्यक्ष यास्मीन आलम ने पीड़ित महिला की हौसला अफजाई करते हुए हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ जो आवाज उसने उठाई है यह सम्भव तभी हुआ है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सामान नागरिकता संहिता कानून लागू करने के बाद पीड़ित महिला को हिम्मत मिली है तथा ओर भी महिलाओं को हिम्मत मिलेगी।उन्होंने सम्मान नागरिकता संहिता कानून लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को सरकार की तरफ से पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

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