सुमित्रानंदन पंत जयंती पर लेखक गांव में राष्ट्रीय संगोष्ठी और काव्य समारोह का आयोजन
अमित कुमार
देहरादून। देश के पहले “लेखक गांव” थानो में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रख्यात कवि एवं कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास ने युवाओं को साहित्य, संस्कृति और भारतीय मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मैं तुम्हें सपने देने आया हूं, बेचने नहीं। लेखक गांव जैसे स्थान ही उन सपनों को संस्कार और दिशा देते हैं।” प्रकृति के सुकुमार कवि एवं छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रा नंदन पंत की जयंती के अवसर पर लेखक गांव स्थित नालंदा पुस्तकालय एवं अटल प्रेक्षागृह में “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड भाषा संस्थान, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी एवं लेखक गांव के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बाल कवियों ने सुमित्रानंदन पंत की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया।
इसके बाद अटल प्रेक्षागृह में दीप प्रज्वलन एवं बच्चों द्वारा लेखक गांव के कुलगीत “लेखक गांव हमारा है” के सामूहिक गायन के साथ द्वितीय सत्र का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया।
“एक कविता लिखने से पहले हजार कविताएं पढ़नी होंगी”
मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में कहा कि यदि किसी युवा को अच्छी कविता लिखनी है तो उसे पहले हजारों कविताएं पढ़नी होंगी। उन्होंने युवाओं से मोबाइल पर बिताए जाने वाले समय को सीमित कर पुस्तकों और साहित्य के साथ अधिक समय बिताने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा भारतीय संस्कृति और साहित्य से जुड़ रहे हैं और लेखक गांव इस सकारात्मक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। सुमित्रानंदन पंत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पंत जी ने अपनी कविताओं में प्रकृति को केवल देखा नहीं, बल्कि जिया है। प्रयाग में रहने के बावजूद उन्होंने अपने भीतर उत्तराखंड हिमालय की आत्मा को सदैव जीवित रखा।
साहित्य समाज को दिशा देता है : निशंक
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि पंत जी का साहित्य भारतीय चिंतन, प्रकृति और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है।
उन्होंने कहा कि पंत जी की रचनाओं में हिमालय की चेतना, प्रकृति की पवित्रता और भारतीय संस्कृति की आत्मा समाहित है। लेखक गांव उसी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त प्रयास है।लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि संवेदनाओं के जीवित रहने से ही साहित्य जीवित रहता है और साहित्य ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है।
साहित्य और प्रकृति का गहरा संबंध
विशिष्ट अतिथि कल्याण सिंह रावत ने कहा कि साहित्य और प्रकृति का संबंध अत्यंत गहरा है तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। भाषा संस्थान की निदेशक डॉ. मायावती ढकरियाल ने बच्चों से पंत जी के जीवन से प्रेरणा लेकर साहित्य और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
काव्य पाठ ने बांधा समां
कार्यक्रम के तृतीय सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें भारती मिश्र, डॉ. समा कौशिक, यामा शर्मा, डॉ. उषा झा, मणिक अग्रवाल, विजय तौरी, प्रीति मनराल, हरेन्द्र नेगी ‘तेजांश’ एवं डॉ. दिनेश शर्मा सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर डॉ. कमला पंत, डॉ. विद्या सिंह, डॉ. शशांक शुक्ला एवं संजय महर ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए सुमित्रानंदन पंत के साहित्यिक योगदान को याद किया। कार्यक्रम का संयोजन पूजा पोखरियाल द्वारा तथा संचालन डॉ. बीना बेंजवाल एवं मोनिका शर्मा द्वारा किया गया। समारोह में भारतीय अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता आरुषि निशंक, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. प्रदीप भारद्वाज, डॉ. राकेश सुन्दरियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल, अनिल शर्मा सहित देशभर से साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं युवा रचनाकारों ने सहभागिता की।












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