सावक मंच का प्रशासन पर सीधा सवाल—जनता की गाढ़ी कमाई से होने वाले कामों में पारदर्शिता और गुणवत्ता से समझौता क्यों?
सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, नशे के अड्डों पर शिकंजा कसने से लेकर स्वतंत्र तकनीकी जांच तक की उठाई मांग
अमित कुमार
हरिद्वार। तीर्थनगरी की पहचान गंगा और आध्यात्मिक आस्था से है, लेकिन शहर में नशे के बढ़ते अवैध कारोबार ने इस पहचान के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। दूसरी ओर अर्धकुंभ की तैयारियों के नाम पर होने वाले करोड़ों रुपये के विकास और निर्माण कार्यों में जनता के धन के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी उठने लगा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय सावक मंच ने प्रशासन के सामने तीखे सवाल और स्पष्ट मांगें रखीं। मंच के संयोजक चंद्रमोहन कौशिक के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट हरिगिरी को ज्ञापन सौंपकर हरिद्वार में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने और अर्धकुंभ से जुड़े विकास कार्यों में सार्वजनिक धन के पारदर्शी एवं जिम्मेदार इस्तेमाल की मांग की।
सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रतिनिधिमंडल से सकारात्मक वार्ता के बाद ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
तीर्थनगरी में नशे का जाल, युवाओं के भविष्य पर सवाल
चंद्रमोहन कौशिक ने कहा कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सनातन संस्कृति की विश्वविख्यात तीर्थनगरी है। ऐसे स्थान पर नशे के अवैध कारोबार का बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। नशे की चपेट में आने वाला व्यक्ति ही नहीं, पूरा परिवार प्रभावित होता है और इसके सामाजिक दुष्परिणाम अपराध, आर्थिक शोषण तथा सामाजिक विघटन के रूप में सामने आ सकते हैं। उन्होंने मांग की कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ नियमित और परिणामोन्मुख अभियान चलाया जाए। संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर विशेष निगरानी की जाए और नशे के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंच ने स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों और युवाओं की अधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर विशेष निगरानी की भी मांग की।
अर्धकुंभ: जनता का पैसा है, हिसाब भी जनता को मिले
मंच ने अर्धकुंभ से जुड़े विकास और निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन के सामने सार्वजनिक धन की पारदर्शिता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। कौशिक ने कहा कि विकास कार्यों पर खर्च होने वाला धन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जनता के कर और सार्वजनिक राजस्व से आता है।
ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि किस परियोजना पर कितना धन स्वीकृत हुआ, काम किस संस्था को मिला, उसकी समयसीमा क्या है और निर्धारित लक्ष्य क्या है। ज्ञापन में प्रमुख परियोजनाओं की स्वीकृत लागत, कार्यदायी संस्था, समयसीमा और उद्देश्य सार्वजनिक करने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की समय-समय पर स्वतंत्र एवं सक्षम तकनीकी एजेंसी से जांच कराने तथा अनावश्यक व्यय, कार्यों की पुनरावृत्ति और सरकारी धन की बर्बादी रोकने के लिए वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की मांग की गई।
‘सार्वजनिक धन जनता की अमानत’
चंद्रमोहन कौशिक ने कहा कि हरिद्वार की पवित्रता केवल गंगा और मंदिरों से नहीं, बल्कि यहां के सामाजिक वातावरण, युवाओं के सुरक्षित भविष्य और पारदर्शी प्रशासन से भी तय होती है। सार्वजनिक धन जनता की अमानत है और उसके एक-एक रुपये के इस्तेमाल में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा जताई। ज्ञापन देने वालों में सावक मंच के जिला अध्यक्ष कीर्तिकांत शर्मा, जिला उपाध्यक्ष शरद अग्रवाल, जिला महामंत्री विशाल यादव, युवा जिलाध्यक्ष शिवम कौशिक, पार्थ शांडिल्य, पीयूष कौशिक, नवीन शर्मा, आशीष पटवाल, गौरव भट्ट, साहिल बग्गा, रचित सिंघल, पंडित सुनील शर्मा, विकास राजपूत, नरेश शर्मा, जय बाली, दिनेश शर्मा, जितेंद्र यादव, मनोज गिरी, सनी भाटिया, विकास अरोड़ा, गोपाल तनेजा, मनोज जैन सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।












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