डिजिटल मीडिया की जवाबदेही से पत्रकार कल्याण तक, BSPS ने तय की रणनीति

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डिजिटल मीडिया की जवाबदेही से पत्रकार कल्याण तक, BSPS ने तय की रणनीति

मीडिया काउंसिल और नेशनल मीडिया रजिस्टर की मांग तेज, पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा-पेंशन नीति व सुरक्षा कानून लागू करने का प्रस्ताव

जी. शर्मा

विशाखापट्टनम। भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ (BSPS) की 13वीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, डिजिटल मीडिया की जवाबदेही और पत्रकारों के सामाजिक-आर्थिक हितों को लेकर व्यापक मंथन हुआ। देशभर से 450 से अधिक पत्रकारों की मौजूदगी में हुई बैठक में मीडिया काउंसिल के गठन, नेशनल मीडिया रजिस्टर, पत्रकारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा एवं पेंशन नीति तथा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अध्यक्षता वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेश्वर पांडा ने की। राष्ट्रीय महासचिव गिरिधर शर्मा ने संगठन की गतिविधियों और आगामी रणनीति की जानकारी दी। इससे पूर्व 16 सितंबर को BSPS की आंध्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार वीरभद्र राव की अध्यक्षता में प्रदेश के पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा हुई। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों ने BSPS की सदस्यता भी ग्रहण की।

डिजिटल मीडिया के लिए आचार संहिता पर जोर

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में डिजिटल मीडिया में बढ़ते प्रभाव के साथ उससे जुड़ी जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठा। संगठन ने केंद्र सरकार से डिजिटल मीडिया के लिए प्रभावी कोड ऑफ कंडक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। साथ ही पत्रकारिता के नाम पर होने वाले गैर-जिम्मेदाराना कार्यों की जवाबदेही तय करने तथा पेशेवर पत्रकार और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के बीच स्पष्ट अंतर निर्धारित करने की आवश्यकता बताई गई।  वरिष्ठ पत्रकार कृष्णमोहन झा ने “लोकतांत्रिक व्यवस्था में एथिक्सपूर्ण पत्रकारिता” विषय पर कहा कि डिजिटल क्रांति ने अभिव्यक्ति और सूचना की पहुंच को व्यापक बनाया है, लेकिन इसके साथ पत्रकारिता की विश्वसनीयता और जवाबदेही से जुड़े सवाल भी बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि केवल हाथ में कैमरा और माइक होने या सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने से कोई व्यक्ति पत्रकार नहीं बन जाता। पत्रकारिता की वास्तविक कसौटी तथ्यों की पुष्टि, विश्वसनीय स्रोत, सभी संबंधित पक्षों का दृष्टिकोण, गलती होने पर सुधार और जनहित की प्राथमिकता होनी चाहिए। झा ने सवाल उठाया कि पत्रकारिता के नाम पर होने वाली गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों की जवाबदेही किसकी होगी और बदलते डिजिटल परिदृश्य में इस व्यवस्था को किस तरह प्रभावी बनाया जाए।

मीडिया काउंसिल के गठन की मांग

कृष्णमोहन झा ने कहा कि पारंपरिक मीडिया के दौर में विकसित नियामक व्यवस्थाओं के सामने डिजिटल मीडिया और नए कंटेंट प्लेटफॉर्म ने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में सरकार को बदलती तकनीकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक मीडिया काउंसिल के गठन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि पेशेवर मानकों, नैतिकता और जवाबदेही को मजबूत करना होना चाहिए।

पत्रकारों के कल्याण पर भी फोकस

बैठक में पत्रकारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने देशभर के पत्रकारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा और पेंशन नीति निर्धारित करने तथा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग दोहराई। राष्ट्रीय महासचिव गिरिधर शर्मा ने कहा कि BSPS की स्थापना के बाद से संगठन पत्रकारों की समस्याओं को लेकर धरातल पर काम कर रहा है। उन्होंने पत्रकारों की हत्या, कथित झूठे मुकदमों, श्रमजीवी पत्रकारों से जुड़े नियमों तथा बीमार पत्रकारों की सहायता सहित विभिन्न मुद्दों पर संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी।

पत्रकार संगठनों की एकता का आह्वान

BSPS के संस्थापक शाहनवाज हसन ने देशभर के पत्रकार संगठनों से पत्रकार हितों की रक्षा के लिए एक मंच पर आने का आह्वान किया। उन्होंने डिजिटल मीडिया में गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई और डिजिटल मीडिया से संबंधित नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता बताई। आंध्र प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र राव ने पत्रकारों के कल्याण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संगठन की गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने पत्रकार हितों के लिए सामूहिक प्रयासों और संगठनात्मक एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

गृह मंत्री नहीं पहुंचे, अन्य अतिथियों की रही मौजूदगी

नव्यांध्र जर्नलिस्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित समारोह में पत्रकारिता की वर्तमान परिस्थितियों, डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, पत्रकारों के कल्याण, संगठनात्मक एकता और नैतिक पत्रकारिता पर विचार-विमर्श हुआ। आमंत्रित मुख्य अतिथि गृह मंत्री अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। हालांकि अन्य आमंत्रित अतिथियों, पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों और BSPS सदस्यों की मौजूदगी रही।राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन स्वतंत्रता का अर्थ जवाबदेही से मुक्त होना नहीं है। स्वतंत्र और उत्तरदायी पत्रकारिता एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तथ्य, निष्पक्षता, जनहित और पेशेवर नैतिकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

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