BSB-RTU के बीच MoU, अब स्कूली छात्रों को AI और रोबोटिक्स की मिलेगी शिक्षा

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स्कूल और उच्च शिक्षा के बीच बनेगा तकनीकी सेतु, राजस्थान के हजारों विद्यार्थियों को मिलेगा अत्याधुनिक तकनीक का व्यावहारिक अनुभव

अमित कुमार

हरिद्वार। स्कूली शिक्षा में तकनीकी दक्षता को नई दिशा देने की पहल के तहत भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB), पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार और राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (RTU), कोटा के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इस साझेदारी से अब स्कूली छात्र उच्च शिक्षा में प्रवेश से पहले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, चिप डिजाइन, सौर ऊर्जा और एग्री-टेक जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर सकेंगे। MoU पर BSB के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एनपी सिंह और RTU के कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा और तकनीकी उच्च शिक्षा के बीच ऐसा सेतु तैयार करना है, जिससे विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही भविष्य की तकनीकों और रोजगारपरक कौशल से जोड़ा जा सके।

NSQF के अनुरूप तैयार होंगे व्यावसायिक पाठ्यक्रम

समझौते के तहत राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (NSQF) के अनुरूप व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें तकनीकी और व्यावहारिक कौशल से लैस करने पर जोर दिया जाएगा।।इसके साथ ही BSB से संबद्ध विद्यालयों के विद्यार्थियों को RTU की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। छात्र विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में AI, रोबोटिक्स, चिप डिजाइन, सौर ऊर्जा और एग्री-टेक जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों को नजदीक से समझ सकेंगे।

मेंटोरशिप से इंटर्नशिप तक खुलेंगे नए अवसर

साझेदारी के तहत विद्यार्थियों के लिए मेंटरशिप, शिक्षक प्रशिक्षण, कैंपस इमर्शन, इंटर्नशिप, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े अवसर विकसित किए जाएंगे। इससे स्कूली स्तर पर ही छात्रों में तकनीकी समझ, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

राजस्थान के हजारों छात्रों के लिए खुलेंगे प्रगति के नए द्वार

BSB से संबद्ध विद्यालयों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या राजस्थान में है। ऐसे में BSB और RTU की यह साझेदारी राजस्थान के हजारों विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्हें स्कूली शिक्षा के दौरान ही अत्याधुनिक तकनीकों का वास्तविक और प्रयोगात्मक अनुभव मिलेगा, जिससे उच्च शिक्षा, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। यह समझौता स्कूली शिक्षा को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ने और विद्यार्थियों को ‘भविष्य के कौशल’ से लैस करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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