अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कार्रवाई, संचालक दोषी करार

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ए. गुप्ता 

हरिद्वार। पीसीपीएनडीटी (पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम, 1994 के उल्लंघन के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरिद्वार ने कनखल स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक को दोषी ठहराते हुए 10 हजार रुपये जुर्माना और न्यायालय के उठने तक कारावास की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दो वर्ष के कारावास का प्रावधान भी किया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में कनखल स्थित मदर केयर क्लीनिक में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच के दौरान पाया गया कि केंद्र बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड सेवाओं का संचालन कर रहा था। इसके बाद तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। मामले की सुनवाई के उपरांत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों और निर्धारित नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए केंद्र संचालक को सजा सुनाई। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि जिले में पीसीपीएनडीटी अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की क्षेत्र में तीन अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील किया है। ये मशीनें वर्तमान में उपयोग में नहीं थीं, लेकिन उनके संभावित दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रूण लिंग जांच और अवैध अल्ट्रासाउंड संचालन जैसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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