लेखक गांव अद्भुत रचना और कल्पना से परे : प्रो. के.जी. सुरेश

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इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक ने किया भारत के प्रथम लेखक गांव का भ्रमण, एमओयू का दिया प्रस्ताव

अमित कुमार

देहरादून। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश ने भारत के प्रथम लेखक गांव का भ्रमण कर इसकी अनूठी अवधारणा और सांस्कृतिक-साहित्यिक स्वरूप की सराहना की। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से भेंट कर साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और भावी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। लेखक गांव पहुंचने पर प्रो. सुरेश ने भगवान नरसिंह नागराजा मंदिर में दर्शन किए तथा परिसर में स्थित नालंदा पुस्तकालय, शोध एवं अनुसंधान केंद्र, संजीवनी वाटिका, नक्षत्र वाटिका और नवग्रह वाटिका का अवलोकन किया। उन्होंने लेखक गांव की समग्र अवधारणा, प्रकृति, अध्यात्म और ज्ञान के समन्वय पर आधारित इसकी विशिष्ट संरचना की सराहना करते हुए इसे भारतीय सांस्कृतिक चेतना का जीवंत केंद्र बताया। इस अवसर पर प्रो. के.जी. सुरेश ने कहा कि लेखक गांव किसी सामान्य परिसर की परिकल्पना नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्यिक चेतना और सृजनशीलता का एक जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि यह स्थान अपनी अद्भुत रचना और कल्पना से परे जाकर निर्मित ऐसा सांस्कृतिक लोक प्रतीत होता है, जहां साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म, प्रकृति और शोध का अनूठा समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि लेखक गांव देशभर के लेखकों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और युवा रचनाकारों के लिए संवाद, चिंतन और सृजन का प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध करा रहा है। अल्प समय में इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और साहित्यिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। भ्रमण के दौरान प्रो. सुरेश और डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के बीच लेखक गांव एवं इंडिया हैबिटेट सेंटर के मध्य सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रो. सुरेश ने दोनों संस्थाओं के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपादित करने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि इसके माध्यम से साहित्य, संस्कृति, शोध, संवाद, प्रकाशन, युवा रचनाकारों के प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक विमर्शों को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संभावित सहयोग देशभर के साहित्यकारों, कलाकारों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा तथा भारतीय सांस्कृतिक चेतना को व्यापक स्तर पर नई ऊर्जा प्रदान करेगा। इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने प्रो. के.जी. सुरेश का स्वागत करते हुए कहा कि लेखक गांव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, अध्यात्म और मानवीय मूल्यों को एक साझा मंच पर स्थापित करना है, ताकि भारतीय सृजन और चिंतन की परंपरा को नई गति मिल सके। उन्होंने कहा कि इंडिया हैबिटेट सेंटर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ प्रस्तावित सहयोग लेखक गांव की राष्ट्रीय पहुंच को और सशक्त बनाएगा तथा उसकी वैचारिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगा।

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