साधु बने बिना भी राम मिल जाते हैं

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*’स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती त्यागीजी महाराज—तपोमय जीवनचरित’ ग्रंथ का लोकार्पण संपन्न*

आर.के.जोशी

राजस्थान। लुक्सा जोहड़ा स्थित परमहंस आश्रम में आध्यात्मिक एवं साहित्यिक वातावरण के बीच महान तपस्वी साधक त्यागीजी महाराज पर आधारित ग्रंथ “स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती—त्यागीजी महाराज : तपोमय जीवनचरित” का लोकार्पण एवं परिचर्चा कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालु एवं प्रतिष्ठित नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे पूरा परिसर भक्तिभाव एवं ज्ञानचर्चा से आलोकित हो उठा। त्यागी महाराज के परम प्रिय शिष्य एवं उनके उत्तराधिकारी लुक्सा जोहड़ा आश्रम पीठाधीश्वर परमहंस केशवानंद सरस्वती के कर-कमलों द्वारा ग्रंथ का विधिवत लोकार्पण किया गया, जो उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत प्रेरणादायी क्षण रहा। स्वामी केशवानंद के शिष्य कृष्ण कुमार पारीक ने उन्हें ग्रंथ की प्रथम प्रति भेंट कर गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को सजीव रूप प्रदान किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन को समाज के लिए अनुपम प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जीवनचरित केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं देता, बल्कि समाज को नैतिक मूल्यों, आत्मानुशासन और जीवन की सार्थक दिशा की ओर अग्रसर करता है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने पुस्तक की उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे युगानुकूल और अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ नई पीढ़ी को भारतीय संत परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। स्वामी केशवानंद की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में सुप्रसिद्ध लेखिका साविता पांडेय दिल्ली द्वारा ग्रंथ की प्रस्तुति एवं संपादन किया गया है। पुस्तक में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के जीवन, उनकी कठोर साधना, आध्यात्मिक अनुभवों एवं जनकल्याणकारी संदेशों का अत्यंत विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन किया गया है, जो पाठकों को आत्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है। समारोह के अंत में सभी उपस्थित जनों ने पुस्तक की प्रतियाँ प्राप्त कर स्वामी जी का आशीर्वाद लिया तथा इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों के प्रति हृदय से आभार एवं शुभकामनाएँ व्यक्त की। आश्रम ट्रस्टी  नंदलाल सरपंच, महेंद्र स्वामी बिल्यू, शिवभगवान पारीक, सुरेश पांडिया, सुनील गर्ग नोहर, जोगेंद्र सिंह राठौड़ बिल्यू, सुखवीर  चारण, महेंद्र सेन, अशोक स्वामी आदि मौजूद रहे।

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