गुरु पूर्णिमा पर जूना अखाड़े में उमड़ी श्रद्धा, महंत हरी गिरि महाराज ने दिया आशीर्वाद
अमित कुमार
हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अखाड़े के इष्टदेव भगवान गुरु दत्तात्रेय का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया गया। पूरे दिन अखाड़ा परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। इस अवसर पर जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरी गिरि महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने देशभर से आए श्रद्धालुओं और शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रातःकाल से ही गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के बिजनौर सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में शिष्य अखाड़े पहुंचे। सभी ने गुरु महाराज के चरणों में वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया, कथा श्रवण किया और गुरु दीक्षा का लाभ लिया। इस अवसर पर महंत हरी गिरि महाराज ने कहा कि गुरु ही जीवन को सही दिशा देने वाला सच्चा मार्गदर्शक होता है। गुरु के बिना ज्ञान अधूरा रहता है और जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझना कठिन हो जाता है। उन्होंने सभी शिष्यों से सेवा, संयम, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।।हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा अथवा व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन, 18 पुराणों तथा महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना कर भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की। सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना गया है। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और शिष्यों ने प्रसाद ग्रहण किया।












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