फेफड़ों में दूध जाने से बिगड़ी हालत, तीन दिन वेंटिलेटर और तीन दिन सेमी-वेंटिलेटर पर रखकर चिकित्सकों ने किया उपचार
डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में एनआईसीयू टीम को मिली सफलता, स्वस्थ होने पर परिजनों को सौंपा बच्चा
अमित कुमार
हरिद्वार। दो अस्पतालों से रेफर होकर अत्यंत गंभीर हालत में एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल पहुंचे नवजात की जान चिकित्सकों की टीम ने छह दिन के गहन उपचार के बाद बचा ली। फेफड़ों में दूध चले जाने से बच्चे की सांस लेने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण उसका रंग नीला पड़ने लगा था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तीन दिन वेंटिलेटर और अगले तीन दिन सेमी-वेंटिलेटर पर रखकर उपचार दिया गया। हालत में सुधार होने के बाद बच्चे को स्वस्थ अवस्था में उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिद्वार के नेहरू कॉलोनी, सलेमपुर निवासी राहुल कुमार के नवजात शिशु को गंभीर अवस्था में एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल लाया गया था। बच्चे की मां कामिनी हैं। अस्पताल पहुंचने के समय नवजात को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो रही थी। चिकित्सकीय भाषा में सायनोसिस कही जाने वाली स्थिति के तहत उसके शरीर पर नीलापन दिखाई दे रहा था। चिकित्सकों के अनुसार, फेफड़ों में दूध चले जाने के कारण बच्चे की श्वसन प्रक्रिया प्रभावित हुई थी और उसकी स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर की ओर बढ़ रही थी।
तीन दिन वेंटिलेटर पर रहा नवजात
नवजात की नाजुक हालत को देखते हुए अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी और उसे सांस लेने में सहायता देने के लिए वेंटिलेटर पर रखा। शुरुआती तीन दिन तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर उपचार किया गया। इसके बाद हालत में सुधार के संकेत मिलने पर अगले तीन दिन तक सेमी-वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ उपचार जारी रखा गया। छह दिनों तक चले गहन उपचार और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी के बाद नवजात की हालत में सुधार हुआ। इसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में परिजनों को सौंप दिया गया। गंभीर हालत में बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे परिवार के लिए यह राहत भरी खबर रही।
डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में टीम ने संभाला मोर्चा
नवजात के उपचार में डॉ. विकास गुप्ता के नेतृत्व में एनआईसीयू टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम में डॉ. मोहम्मद सलमान, डॉ. शुभम, डॉ. अक्षत और डॉ. स्नेहा भी शामिल रहे। चिकित्सकों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए श्वसन संबंधी सहायता, निरंतर निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। नवजात का स्वस्थ होना गंभीर परिस्थितियों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल और एनआईसीयू की भूमिका को रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में समय पर उपचार और बच्चे की स्थिति के अनुरूप उचित चिकित्सकीय प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।











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