पंकज कुमार जोशी
नोहर। सामाजिक समरसता मंच, नोहर के तत्वावधान में डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक गोष्ठी का आयोजन किया गया। “सशक्त एवं समरस राष्ट्र के निर्माण में डॉ. आंबेडकर का योगदान” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों एवं युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता, समरसता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में धर्म जागरण विभाग के प्रांतीय सह संयोजक सरदार हरप्रीत सिंह उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता भारतमाता आश्रम के महंत योगी रामनाथ अवधूत ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारतमाता एवं डॉ. आंबेडकर के चित्र के समक्ष श्रद्धापूर्वक पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान वातावरण राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के भाव से ओत-प्रोत दिखाई दिया। मुख्य वक्ता सरदार हरप्रीत सिंह ने अपने विस्तृत उद्बोधन में डॉ. आंबेडकर के जीवन संघर्ष, उनके अद्वितीय व्यक्तित्व एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक गाथा है।
उन्होंने विपरीत परिस्थितियों और गहरे सामाजिक भेदभाव के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प के बल पर कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि डॉ. आंबेडकर ने भारत को एक ऐसा संविधान प्रदान किया, जो न केवल लोकतंत्र की आधारशिला है, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और स्वतंत्रता का जीवंत दस्तावेज भी है। संविधान निर्माण के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को ध्यान में रखते हुए समावेशी दृष्टिकोण अपनाया। सरदार हरप्रीत सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि अनेक धर्म-पंथों द्वारा उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया, किन्तु उन्होंने अपने विचारों और सिद्धांतों के अनुरूप अंततः बौद्ध धर्म को अपनाया, जो करुणा, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने डॉ. आंबेडकर द्वारा महिलाओं की शिक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा तथा समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए किए गए सतत संघर्ष को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने वाले और समानता की स्थापना के लिए प्रेरणास्रोत हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महंत योगी रामनाथ अवधूत ने अपने उद्बोधन में इस दिन के बहुआयामी महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल डॉ. आंबेडकर की जयंती ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने खालसा पंथ की स्थापना कर राष्ट्र और धर्म की रक्षा का महान संदेश दिया था। इसके साथ ही भक्त सैन जी महाराज एवं महर्षि रमण की जयंती का भी स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के जीवन से हमें सेवा, त्याग और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा मिलती है।मुख्य अतिथि नानूराम मुनपरिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में एकता, समरसता और आपसी सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक समरसता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है और हमें सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर एकजुट होकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए। गोष्ठी में जिला परिषद सदस्य दीपचंद बैनीवाल, अभिषेक पारीक, शैलेन्द्र वर्मा, मेघ सिंह राठौड़, वैद्य कैलाश पंडा, पवन स्वामी, मुकेश सिंह राठौड़, सुरेन्द्र गालड, विनोद जोशी, अजीत सिंह राठौड़, महावीर सिंह वालिया, बनवारी लाल स्वामी, शिक्षाविद तेज कुमार शर्मा ,गोपाल राम स्वामी, राधेश्याम शर्मा, ओम प्रकाश स्वामी, टीकूराम, सरदार सुरेन्द्र सिंह, सुरेश मीणा, लादू राम चोमिया, हरीश चंद्र शर्मा, अनिल पारीक, गोविंद महिया, पवन शर्मा, ताराचंद सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन रमेश पारीक ने कुशलतापूर्वक किया, जिससे आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। अंत में सभी उपस्थितजनों ने डॉ. आंबेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने और एक समरस एवं सशक्त राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।












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