मजदूरों की आवाज दबाने का आरोप, ट्रेड यूनियन मोर्चा ने भरी हुंकार; मुकदमें वापस लेने की मांग

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हरिद्वार में श्रमिक संगठनों का ऐलान—ठेका प्रथा खत्म हो, श्रम कानूनों का हो सख्ती से पालन, उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन रहेगा जारी

अमित कुमार

हरिद्वार। उद्योगों में श्रमिकों के कथित उत्पीड़न, श्रम कानूनों की अनदेखी और मजदूर नेताओं पर मुकदमें दर्ज किए जाने के विरोध में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा ने मोर्चा खोल दिया है। प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने फैक्ट्री प्रबंधनों पर श्रमिकों की जायज मांगों को दबाने का आरोप लगाते हुए श्रमिक नेताओं पर दर्ज कथित झूठे मुकदमे तत्काल वापस लेने, ठेका प्रथा समाप्त करने और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग उठाई। इंकलाबी मजदूर केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी ने कहा कि फैक्ट्रियों में अपने अधिकारों की आवाज उठाने वाले श्रमिकों को कथित तौर पर मुकदमों में फंसाकर डराने और परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है। मजदूरों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को निशाना बनाने की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने से औद्योगिक क्षेत्र में असंतोष बढ़ेगा।

न्यूनतम वेतन और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों की मांग

पंकज बवाड़ी ने कहा कि श्रमिक लंबे समय से न्यूनतम वेतन, सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग उठा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि उद्योगों में श्रम कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए, श्रमिकों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगे और मजदूर नेताओं पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

मांगें नहीं मानी तो जारी रहेगा संघर्ष

पत्रकार वार्ता में दीपा ने भी श्रम कानूनों के कथित उल्लंघन और श्रमिकों के उत्पीड़न की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और न्याय से जुड़े सवालों पर समझौता नहीं किया जाएगा। यदि उनकी जायज मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन जारी रखा जाएगा। पत्रकार वार्ता में खेमानंद, रोहित, सुनील, आनंद, अवधेश, गोविंद, राजकिशोर, नीता, रजनी और अनिल सैनी सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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