जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में निकाली गई सड़क सुरक्षा रैली, हर की पैड़ी पर लगा जागरूकता शिविर
अमित गुप्ता
हरिद्वार। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, परिवहन विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा” जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को एक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र दत्त ने न्यायालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना और सड़क पर जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग सजगता और अनुशासन के साथ यातायात नियमों का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है तथा प्रत्येक जीवन सुरक्षित रह सकता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरतजीत कौर ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल कानूनी सख्ती से नहीं बल्कि जन-जागरूकता और आत्म-अनुशासन के माध्यम से प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित यात्रा को अपनी प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान विधि के छात्रों ने एक प्रेरणादायक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, ओवरस्पीडिंग से बचने तथा शराब पीकर वाहन न चलाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।
रैली में परिवहन विभाग की ओर से वरुणा सैनी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। इसी क्रम में ‘विश्व बाल श्रम निषेध दिवस’ के अवसर पर हर की पैड़ी क्षेत्र में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जिला बाल कल्याण समिति, श्रम विभाग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। शिविर में उपस्थित बच्चों एवं स्थानीय लोगों को बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनों तथा बच्चों के अधिकारों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है तथा बाल श्रम इन अधिकारों का उल्लंघन है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रम विभाग एवं बाल कल्याण समिति द्वारा क्षेत्र में बाल श्रम उन्मूलन के लिए सघन जागरूकता अभियान भी चलाया गया। अभियान के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना संबंधित विभागों को दें तथा यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा अपने शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।











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