अमित कुमार
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित निष्काम सेवा ट्रस्ट परिसर में विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संत मार्गदर्शक मण्डल की दो दिवसीय बैठक आध्यात्मिक गरिमा और राष्ट्रीय चेतना के वातावरण में प्रारम्भ हुई। देशभर के विभिन्न पीठों, अखाड़ों, सम्प्रदायों एवं आध्यात्मिक परम्पराओं से जुड़े प्रमुख संत-महात्माओं और धर्माचार्यों की उपस्थिति में आयोजित यह बैठक राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और मानवता के कल्याण से जुड़े समसामयिक विषयों पर व्यापक चिंतन-मंथन का केंद्र बनी। बैठक में हिन्दू समाज के संगठन, सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन, गौसंरक्षण, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, सेवा कार्यों के विस्तार, सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, युवा जागरण, धर्मांतरण की चुनौतियों, राष्ट्रीय एकात्मता तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। संत समाज ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए समाज को जागरूक, संगठित और संस्कारित बनाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान की आवश्यकता पर बल दिया। संतों और धर्माचार्यों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में निहित है तथा धर्म, सेवा, संस्कार और समरसता के आधार पर ही राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को शांति, सद्भाव, करुणा, सह-अस्तित्व और विश्वबंधुत्व का संदेश देने वाली जीवन-पद्धति है। इसके संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
बैठक में उपस्थित संतों ने विश्व हिन्दू परिषद द्वारा सेवा, संगठन और संस्कार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संत शक्ति और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयास ही राष्ट्रनिर्माण, लोकमंगल और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नई दिशा दे सकते हैं। सभी संत-महात्माओं ने धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्रहित के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने तथा भारत को पुनः विश्व के आध्यात्मिक नेतृत्व के शिखर पर स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया। बैठक में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, महानिर्वाणी पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती महाराज, ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती महाराज, अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वात्मानन्द महाराज, स्वामी परमानन्द महाराज, निर्मल पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानदेव सिंह महाराज, साध्वी ऋतंभरा, युधिष्ठिर महाराज शदाणी दरबार, स्वामी जितेन्द्रनाथ महाराज, शांतिकुञ्ज के डॉ. चिन्मय पण्ड्या, साध्वी पूर्णप्रज्ञा, देवलाचार्य-अविचलाचार्य महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती, डॉ. भदन्त राहुल बोधि, महामण्डलेश्वर संतोषी माता, स्वामी ब्रह्मेशानन्द महाराज तथा महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने सहभागिता की। विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश जी, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री संगठन मिलिंद परांडे, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक तिवारी, क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश विनायक, प्रांत संगठन मंत्री अजय कुमार, बजरंग दल के क्षेत्र संयोजक अनुज वालिया, बलराम कपूर और सौरभ चौहान सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संत मार्गदर्शक मण्डल की यह बैठक भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकात्मता और वैश्विक मानव कल्याण के प्रति संत समाज की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक मानी जा रही है। संतों ने विश्वास व्यक्त किया कि आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता पर आधारित यह चिंतन समाज जीवन को नई दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा।











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