शहीदों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव या निवास क्षेत्र में होंगी स्थापित, रामपुर तिराहा स्मारक का होगा विस्तार
अमित कुमार
मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के बलिदान को नमन किया।मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य आंदोलन में शहीद हुए जिन आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं हो पाई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी। उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर के पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने तथा संग्रहालय के विस्तार की घोषणा भी की। संग्रहालय में उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की बात भी कही।
रामपुर तिराहा कांड को बताया राज्य आंदोलन का पीड़ादायक अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। पृथक राज्य की मांग को लेकर खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया। उनके संघर्ष और त्याग के परिणामस्वरूप उत्तराखंड पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान तथा हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल करते हुए तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
शहीद स्मारक में प्रतिमाओं की स्थापना का शिलान्यास
मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के शहीद आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का शिलान्यास भी किया। उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं की स्थापना के लिए 27 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है। उन्होंने शहीद स्मारक के लिए भूमि दान करने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान को नमन किया और बताया कि उनकी प्रतिमा भी स्मारक परिसर में स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के दौरान आंदोलनकारियों की सहायता करने वाले स्थानीय लोगों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में स्थानीय लोगों ने आंदोलनकारियों को सहयोग और शरण दी, जिसे उत्तराखंड की जनता सदैव स्मरण रखेगी।
मातृशक्ति के योगदान को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका अतुलनीय रही। माताओं और बहनों ने तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए आंदोलन को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। शहीदों और आंदोलनकारियों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि अमर बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और अग्रणी राज्य बनाया जाए। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, मुजफ्फरनगर भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक वंदना, पूर्व विधायक अशोक कंसल, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, उत्तराखंड राज्य किसान आयोग के उपाध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह, उत्तराखंड संस्कृति विभाग की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, राज्य आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, पंडित महावीर शर्मा के पुत्र पप्पू शर्मा, राज्य गोसदन के अध्यक्ष पंडित राजेंद्र अन्थवाल, संस्कृति विभाग के सचिव युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, एसपी देहात अभय प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।










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