मंथरा की चाल, कैकेयी के वरदान और राम वनवास ने नम की दर्शकों की आंखें

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भेल सेक्टर-1 की ऐतिहासिक रामलीला के 52 वर्ष पूरे, विधायक आदेश चौहान ने कलाकारों के अभिनय को सराहा

डॉ. हिमांशु द्विवेदी

हरिद्वार। भेल सेक्टर-1 की ऐतिहासिक रामलीला में मंथरा-कैकेयी संवाद, दशरथ से दो वरदान मांगने और भगवान श्रीराम के वनवास के भावुक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने ऐसा समां बांधा कि राम वनवास के दृश्य के दौरान दर्शक भावुक हो उठे और कई आंखें नम हो गईं। देर रात तक रामभक्त मंचन में डूबे रहे। रामलीला के मंच पर जैसे ही मंथरा ने कैकेयी के मन में संदेह और राजमोह के बीज बोने शुरू किए, कहानी ने नाटकीय मोड़ ले लिया। मंथरा ने कैकेयी को समझाया कि राजा दशरथ राम का राज्याभिषेक करने जा रहे हैं। इससे कौशल्या का प्रभाव बढ़ेगा और भरत राजसत्ता से दूर हो जाएंगे। शुरुआत में भगवान श्रीराम के प्रति अपने अगाध प्रेम के कारण कैकेयी मंथरा की बातों का विरोध करती है, लेकिन लगातार उकसावे और कुटिल तर्कों के आगे उसका मन बदलने लगता है।

दो वरदानों ने बदल दी अयोध्या की नियति

इसके बाद कोप भवन में कैकेयी और महाराज दशरथ के बीच हुए संवाद का मार्मिक मंचन किया गया। कैकेयी ने राजा को उनके पूर्व में दिए गए दो वरदानों की याद दिलाते हुए पहले वरदान में भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और दूसरे में श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया।

कैकेयी की मांग सुनकर महाराज दशरथ स्तब्ध रह गए। उन्होंने कैकेयी को अपना निर्णय बदलने के लिए बार-बार मनाया, लेकिन वह अपने हठ पर अडिग रही। कलाकारों ने दशरथ की विवशता, कैकेयी की कठोरता और राजमहल में पसरे शोक को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद भगवान श्रीराम के वल्कल वस्त्र धारण कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन की ओर प्रस्थान करने का दृश्य मंचित हुआ। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राजमहल छोड़कर वनवास के लिए निकलना देख दर्शक भावुक हो गए। रामलीला के इन प्रसंगों ने त्याग, कर्तव्य, पारिवारिक संबंधों और वचनपालन की महत्ता को जीवंत कर दिया।

52 वर्षों से संस्कृति की परंपरा को संजो रही समिति

रामलीला देखने पहुंचे क्षेत्रीय विधायक आदेश चौहान ने कलाकारों से मुलाकात कर उनके अभिनय की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद सेक्टर-1 रामलीला समिति निरंतर प्रगति कर रही है और भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। श्रमिक यूनियन इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह और भेल व्यापार मंडल के अध्यक्ष मुकेश चौहान ने भेल की रामलीला के 52 वर्ष पूरे होने पर समिति को बधाई दी। उन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए समिति के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर रामलीला समिति के सचिव राधेश्याम, कोषाध्यक्ष गौरव ओझा, संजय वर्मा, राकेश कुमार, सुबोध कुमार, सोमदत्त, धनंजय, राजकुमार यादव, वीरेंद्र नेगी सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में रामभक्त उपस्थित रहे।

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