संगठन की पगडंडी से राज्यसभा की राह तक पहुंचे दिनेश आर्य

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आरएसएस-एबीवीपी से दिनेश आर्य का शुरू हुआ लंबा संगठनात्मक सफर

अमित गुप्ता

देहरादून। उत्तराखंड में राज्यसभा की रिक्त होने वाली एक सीट के चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को उनके नाम पर मुहर लगाई। राज्यसभा के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है। दिनेश आर्य वर्तमान में उत्तराखंड राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) हैं। भाजपा संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे आर्य को पार्टी के जमीनी और संगठनात्मक ढांचे से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता है। उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने को पार्टी की सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम राजनीतिक आकलन पार्टी के निर्णय और संबंधित नेताओं के बयानों पर निर्भर करेगा।

आरएसएस-एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

दिनेश आर्य ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से की। आरएसएस में उन्होंने तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद एबीवीपी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे और भाजपा में आने के बाद विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। नैनीताल में जिला संयोजक के रूप में कार्य करने के साथ उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा में भी अलग-अलग दायित्व निभाए। वर्ष 2007 से 2010 तक वे भाजपा नैनीताल के जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद अनुसूचित जाति मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाली।

राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी भी रहे

वर्ष 2017 से 2021 तक दिनेश आर्य भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी रहे। वर्ष 2021 में उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) बनाया गया। इसके बाद दिसंबर 2023 में उन्हें उत्तराखंड राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया। दायित्व संभालने के बाद वे पेयजल योजनाओं की समीक्षा और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकों में सक्रिय रहे हैं।

संगठन से राज्यसभा तक पहुंचा सफर

भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब दिनेश आर्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने से उनके राजनीतिक सफर का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की इस सीट को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है।

 

 

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